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जीवन भर ज्ञान बांटते रहे मौलाना हुसैनी
Varanasi
Updated Mon, 26 May 2014 05:34 AM IST
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वाराणसी। शिया धार्मिक विद्वान मौलाना सैयद मुहम्मद हुसैनी की बरसी पर रविवार को इमानिया कालेज मुकीमगंज में, मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें उलेमा ने उनकी इल्मी खिदमात और जिंदगी पर रोशनी डाली तो शायरों ने कलामों से उनकी शान में कसीदे पढ़े।
मजलिस की शुरुआत मौलवी अली अहमद की तिलावते कलामे पाक से हुई। बाद में कासिम अली जानी ने पुत्रों के साथ सोजख्वानी की। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना महमूदुल हसन ने कहा कि मौलाना हुसैनी ने अपना पूरा जीवन ज्ञान बांटने में गुजार दिया। उनके पढ़ाए हुए लोग दुनिया भर में इल्म की रोशनी फैला रहे हैं। पूर्वांचल में भी उनके इल्म से नवाजे सैकड़ों लोग हैं, जो अपनी खिदमत से लोगों के इल्म में इजाफा कर रहे हैं। मजलिस के बाद शायर रिजवान बनारसी, मातमदार बनारसी, अतश बनारसी, रेहान बनारसी और अतहर बनारसी ने कलाम पेश किए। इसके बाद अंजुमन हुसैनिया ने नौहा मातम किया। शुक्रिया इमामे जुमा बनारस मौलाना जफर हुसैनी ने किया। बाद में लोगों में तबर्रुक तकसीम किया गया।
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मजलिस की शुरुआत मौलवी अली अहमद की तिलावते कलामे पाक से हुई। बाद में कासिम अली जानी ने पुत्रों के साथ सोजख्वानी की। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना महमूदुल हसन ने कहा कि मौलाना हुसैनी ने अपना पूरा जीवन ज्ञान बांटने में गुजार दिया। उनके पढ़ाए हुए लोग दुनिया भर में इल्म की रोशनी फैला रहे हैं। पूर्वांचल में भी उनके इल्म से नवाजे सैकड़ों लोग हैं, जो अपनी खिदमत से लोगों के इल्म में इजाफा कर रहे हैं। मजलिस के बाद शायर रिजवान बनारसी, मातमदार बनारसी, अतश बनारसी, रेहान बनारसी और अतहर बनारसी ने कलाम पेश किए। इसके बाद अंजुमन हुसैनिया ने नौहा मातम किया। शुक्रिया इमामे जुमा बनारस मौलाना जफर हुसैनी ने किया। बाद में लोगों में तबर्रुक तकसीम किया गया।
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