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वडनगर का नया काशी कनेक्शन
Varanasi
Updated Tue, 29 Apr 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के गांव वडनगर का काशी कनेक्शन जानकर आप की आंखें खुली रह जाएंगी। राजनीतिक सफर में मोदी के लिए यह जमीन भले नई दिख रही हो लेकिन उनके पुरखों का यहां से वर्षों पुराना रिश्ता सामने आया है। नित नई मिलने वाली जानकारियां उनके विरोधियों की जुबान पर ताले लगा देंगी। इस प्राचीन शहर में गांव-घर के लोग, रिश्तेदार तो मिले ही हैं, अब उनके कुलदेवता का प्राचीन मंदिर भी ढूंढ निकाला गया है। पता चला है कि वडनगर और उससे लगे गांव विशनगर के लोगों ने अपने कुलदेवता के रूप में 1966 में हाटकेश्वर महादेव का मंदिर काशी में स्थापित कराया था। इस मंदिर के पुजारी और प्रबंधक ने मोदी को वहां हाजिरी लगाने के लिए संदेश भी भिजवा दिया है।
वडनगर गांव में कुलदेवता के रूप में पूजे जाने वाले हाटकेश्वर महादेव का भव्य मंदिर यहां दुग्ध विनायक मोहल्ले में है। करीब तीन सौ साल पहले वहां से काशी आकर बसे लोगों की पीढि़यों ने इस मंदिर का निर्माण 48 साल पहले पुरुषोत्तम दास की प्रेरणा से कराया था। मंदिर की दीवार पर लगी एक पट्टिका से भी इसकी पुष्टि होती है। उस पट्टिका पर लिखा है कि नारायण दास, वल्लभदास, श्रीनाथ दास और घनश्याम दास ने दुग्ध विनायक मोहल्ले में कुल देवता का मंदिर बनवाने के लिए जमीन दान दी थी। विशा नागर वैश्य सभा ने वहां मंदिर की स्थापना कराई। यहां भी गुजराती इस मंदिर को अपने तीर्थ के रूप में मानते हैं। मंदिर प्रबंधन से जुड़े अश्विनी पारिख बताते हैं कि किसी शुभ कार्य को करने से पहले कुल देवता की इस चौखट पर गुजराती पहली हाजिरी लगाना नहीं भूलते। वडनगर के इस काशी कनेक्शन ने मोदी की इंट्री में चार चांद लगा दिया है। अब उस मंदिर के पुजारी दिलीप भट्टराई ने मोदी को वहां हाजिरी लगाने के लिए न्यौता भेजा है।
कोट
वडनगर और विशनगर गावों से गुजराती परिवार करीब तीन सौ साल पहले काशी आकर बसे थे। बाद में उन्होंने अपने कुल देवता हाटकेश्वर महादेव के मंदिर का निर्माण दुग्ध विनायक मोहल्ले में कराया था। यह मंदिर वडनगर के लोगों की आस्था का प्रतीक है।-वल्लभदास नागर-मंत्री, विशनगर वैश्य सभा काशी
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वडनगर गांव में कुलदेवता के रूप में पूजे जाने वाले हाटकेश्वर महादेव का भव्य मंदिर यहां दुग्ध विनायक मोहल्ले में है। करीब तीन सौ साल पहले वहां से काशी आकर बसे लोगों की पीढि़यों ने इस मंदिर का निर्माण 48 साल पहले पुरुषोत्तम दास की प्रेरणा से कराया था। मंदिर की दीवार पर लगी एक पट्टिका से भी इसकी पुष्टि होती है। उस पट्टिका पर लिखा है कि नारायण दास, वल्लभदास, श्रीनाथ दास और घनश्याम दास ने दुग्ध विनायक मोहल्ले में कुल देवता का मंदिर बनवाने के लिए जमीन दान दी थी। विशा नागर वैश्य सभा ने वहां मंदिर की स्थापना कराई। यहां भी गुजराती इस मंदिर को अपने तीर्थ के रूप में मानते हैं। मंदिर प्रबंधन से जुड़े अश्विनी पारिख बताते हैं कि किसी शुभ कार्य को करने से पहले कुल देवता की इस चौखट पर गुजराती पहली हाजिरी लगाना नहीं भूलते। वडनगर के इस काशी कनेक्शन ने मोदी की इंट्री में चार चांद लगा दिया है। अब उस मंदिर के पुजारी दिलीप भट्टराई ने मोदी को वहां हाजिरी लगाने के लिए न्यौता भेजा है।
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वडनगर और विशनगर गावों से गुजराती परिवार करीब तीन सौ साल पहले काशी आकर बसे थे। बाद में उन्होंने अपने कुल देवता हाटकेश्वर महादेव के मंदिर का निर्माण दुग्ध विनायक मोहल्ले में कराया था। यह मंदिर वडनगर के लोगों की आस्था का प्रतीक है।-वल्लभदास नागर-मंत्री, विशनगर वैश्य सभा काशी
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