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जनकपुरी की गलियों में राम-लक्ष्मण पर फूलों की वर्षा
Varanasi
Updated Sun, 22 Sep 2013 05:37 AM IST
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रामनगर। जगविख्यात रामनगर की रामलीला में शनिवार को फूलों की पंखुडि़यों की बारिश हुई तो देव स्वरूपों के साथ सैकड़ों लीला प्रेमी खुशबू से भीगकर तरबतर होते रहे। सीता स्वयंवर के चलते मुनि विश्वामित्र के साथ जनकपुर की फुलवारी में पहुंचे भगवान राम और लक्ष्मण को निहारने के लिए हर कोई आतुर था। 36वीं वाहिनी पीएसी के ठीक सामने जनकपुर मंदिर परिसर में यह लीला हुई।
जनकपुरी की गलियों से भगवान राम और लक्ष्मण जब गुजरे तो मोहक छवि देखकर हर तरफ से फूलों की वर्षा होने लगी। लीलाप्रेमी सैकड़ों नर-नारी पलक-पांवड़े बिछाए रहे। हर कोई भगवान राम को स्पर्श करने की होड़ में था। जनकपुरी दर्शन के बाद फुलवारी का मंचन हुआ। प्रात: मुर्गे की बोली सुनते ही पहले लक्ष्मण और फिर राम उठते हैं। गुरु को प्रणाम करने के बाद आज्ञा लेकर फूल लेने के लिए बगीचे में राम-लक्ष्मण का प्रवेश होता है। उसी समय सखियों के साथ गिरिजा पूजन के लिए सीता भी फुलवारी में पहुंच जाती हैं। सखियां गीत गाती हुईं जानकी जी को चारों तरफ से घेरे हुए चलती हैं। उस दौरान भगवान राम को देख सकुचाई जानकी एक बार फिर उनकी सूरत देखने के लिए आतुर नजर आती हैं। वह अपनी लालसा सखियों से व्यक्त करती हैं। सीता ने मंदिर ने गिरिजा पूजन किया। गिरिजा जी सीता की प्रार्थना सुनकर प्रसन्न हो जाती हैं। आकाशवाणी होती है कि हे जानकी, हमारी सत्यवाणी सुनों। तुम्हारे मन की कामना पूरी होगी, जिसमें तुम्हारा मन लगा है, वही वर तुमको मिलेगा। गौरी जी का आशीर्वाद सुनकर सखियों के साथ सीता प्रसन्न भाव से राजमहल में चली जाती हैं। इधर, संध्या-वंदन के बाद भगवान राम गुरु विश्वामित्र के पास प्रणाम करने पहुंचते हैं। इसी के साथ लीला को विराम दे दिया गया। लीला देखने के लिए लोग पारंपरिक तरीके से सज-संवर कर पहुंच रहे हैं।
रामलीला में आज
रामनगर : धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद
जाल्हूपुर :धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद
शिवपुर : अहिल्या तारण, गंगा जी दर्शन, जनकपुर विश्राम
लक्सा : जनकपुरी दर्शन, अष्टसखी संवाद, फुलवारी
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जनकपुरी की गलियों से भगवान राम और लक्ष्मण जब गुजरे तो मोहक छवि देखकर हर तरफ से फूलों की वर्षा होने लगी। लीलाप्रेमी सैकड़ों नर-नारी पलक-पांवड़े बिछाए रहे। हर कोई भगवान राम को स्पर्श करने की होड़ में था। जनकपुरी दर्शन के बाद फुलवारी का मंचन हुआ। प्रात: मुर्गे की बोली सुनते ही पहले लक्ष्मण और फिर राम उठते हैं। गुरु को प्रणाम करने के बाद आज्ञा लेकर फूल लेने के लिए बगीचे में राम-लक्ष्मण का प्रवेश होता है। उसी समय सखियों के साथ गिरिजा पूजन के लिए सीता भी फुलवारी में पहुंच जाती हैं। सखियां गीत गाती हुईं जानकी जी को चारों तरफ से घेरे हुए चलती हैं। उस दौरान भगवान राम को देख सकुचाई जानकी एक बार फिर उनकी सूरत देखने के लिए आतुर नजर आती हैं। वह अपनी लालसा सखियों से व्यक्त करती हैं। सीता ने मंदिर ने गिरिजा पूजन किया। गिरिजा जी सीता की प्रार्थना सुनकर प्रसन्न हो जाती हैं। आकाशवाणी होती है कि हे जानकी, हमारी सत्यवाणी सुनों। तुम्हारे मन की कामना पूरी होगी, जिसमें तुम्हारा मन लगा है, वही वर तुमको मिलेगा। गौरी जी का आशीर्वाद सुनकर सखियों के साथ सीता प्रसन्न भाव से राजमहल में चली जाती हैं। इधर, संध्या-वंदन के बाद भगवान राम गुरु विश्वामित्र के पास प्रणाम करने पहुंचते हैं। इसी के साथ लीला को विराम दे दिया गया। लीला देखने के लिए लोग पारंपरिक तरीके से सज-संवर कर पहुंच रहे हैं।
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रामलीला में आज
रामनगर : धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद
जाल्हूपुर :धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद
शिवपुर : अहिल्या तारण, गंगा जी दर्शन, जनकपुर विश्राम
लक्सा : जनकपुरी दर्शन, अष्टसखी संवाद, फुलवारी