संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय: 94 हजार दुर्लभ पांडुलिपियों के बहुरेंगे दिन, 57 करोड़ की लागत से होगा डिजिटलाइजेशन
वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन पुस्कालय में संग्रहित 94 हजार दुर्लभ पांडुलिपियों के दिन बहुरेंगे। 57 करोड़ की लागत से पांडुलिपियों का संरक्षण और डिजिटलाइजेशन किया जाएगा।
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वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन पुस्कालय में संग्रहित 94 हजार दुर्लभ पांडुलिपियों के दिन बहुरेंगे। 57 करोड़ की लागत से पांडुलिपियों का संरक्षण और डिजिटलाइजेशन किया जाएगा। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग से बातचीत के दौरान पांडुलिपियों के संरक्षण, संवर्धन एवं डिजिटलाइजेशन के लिए शासन ने सहयोग देने पर सहमति जताई है।
संरक्षण के लिए 47 करोड़ रुपये तथा डिजिटलाइजेशन के लिए 10 करोड़ रुपये की परियोजना बनाकर शासन को भेजा जाएगा। संस्कृति मंत्रालय की निगरानी में कार्य पूर्ण होगा। इसके तहत पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए लाल कपड़ों को एक विशेष रसायन में लेप लगाकर व्यवस्थित किया जाएगा तथा इसका अध्ययन/शोध और प्रकाशन भी किया जाएगा।
एक हजार साल पुरानी है श्रीमद्भागवतगीता
सरस्वती भवन पुस्तकालय में दुर्लभ पांडुलिपियों का भंडार है। इसमें हस्तलिखित एक हजार साल पुरानी श्रीमद्भागवत प्रमुख है। यह देश की प्राचीनतम पांडुलिपि है। इसी तरह स्वर्णपत्र आच्छादित, लाक्षपत्र पर कमवाचा (वर्मी लिपि) यहीं संग्रहित है। स्वर्णाक्षरयुक्त रास पंचाध्यायी (सचित्र) की सूक्ष्म कलात्मकता अनुपम है।
भवनों के जीर्णोद्धार के लिए मिलेंगे छह करोड़
कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि उच्च शिक्षा अपर सचिव मोनिका एस गर्ग ने विश्वविद्यालय के प्राचीन और जीर्ण-शीर्ण भवनों के जीर्णोद्धार के लिए भी शासन स्तर से सहयोग करने के लिए छह करोड़ रुपये की योजना बनाकर प्रस्तुत करने को कहा है। इसको भी तैयार करके जल्द शासन को भेजा जाएगा।