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वरुणा किनारे के किसानों की खेती चार साल से प्रभावित
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वाराणसी। वरुणा तटीय इलाके के किसानों की खेती-बाड़ी पिछले चार सालों से प्रभावित है। कार्यदायी संस्था के काम के कारण किसानों के खेत की सीमा भी समाप्त हो चुकी है। रविवार को मकबूल आलम रोड स्थित यादव बस्ती में आयोजित बैठक में किसानों ने यह जानकारी दी। किसानों का कहना था कि चौकाघाट स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय पुल के तटीय किसान वरुणा कॉरिडोर के लिए जमीन देने के लिए तैयार हैं। बावजूद इसके सरकार और प्रशासन किसानों पर ध्यान नहीं दे रही है। वरुणा कॉरिडोर के कारण पिछले चार सालों से उनकी खेती प्रभावित है।
कार्यदायी संस्था की वजह से किसानों का काफी नुकसान हुआ है। संस्था की मशीनों के चलते हमारी जमीनें एक-दूसरे में मिल गई हैं। सरकार भूमि का अधिग्रहण नहीं करना चाहती है तो विक्रय पर कोई प्रतिबंध न लगाया जाए। इसकी तत्काल घोषणा हो। इस मामले में सांसद व प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन को कई बार पत्र लिखा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। किसानों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं पूरी हाेंगी, वह मतदान नहीं करेंगे। मतदान वाले दिन घरों में बजरंग बली से ही न्याय दिलाने की गुहार लगाएंगे। बैठक की अध्यक्षता सीताराम यादव ने की। इस दौरान दयाशंकर यादव, राजनारायण यादव, गुरु प्रसाद शुक्ल, मनीष मौर्य, विजय शंकर, किशुन, रामधनी, विनोद, मंजू, नीलम, सीताराम आदि मौजूद रहे।
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कार्यदायी संस्था की वजह से किसानों का काफी नुकसान हुआ है। संस्था की मशीनों के चलते हमारी जमीनें एक-दूसरे में मिल गई हैं। सरकार भूमि का अधिग्रहण नहीं करना चाहती है तो विक्रय पर कोई प्रतिबंध न लगाया जाए। इसकी तत्काल घोषणा हो। इस मामले में सांसद व प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन को कई बार पत्र लिखा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। किसानों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं पूरी हाेंगी, वह मतदान नहीं करेंगे। मतदान वाले दिन घरों में बजरंग बली से ही न्याय दिलाने की गुहार लगाएंगे। बैठक की अध्यक्षता सीताराम यादव ने की। इस दौरान दयाशंकर यादव, राजनारायण यादव, गुरु प्रसाद शुक्ल, मनीष मौर्य, विजय शंकर, किशुन, रामधनी, विनोद, मंजू, नीलम, सीताराम आदि मौजूद रहे।
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