फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   सुनहरी यादें सहेज भारी मन से मेहमान विदा

सुनहरी यादें सहेज भारी मन से मेहमान विदा

Thu, 24 Jan 2019 01:58 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 24 Jan 2019 01:58 AM IST
विज्ञापन
सुनहरी यादें सहेज भारी मन से मेहमान विदा
वाराणसी। प्यार, दुलार, आदर और सत्कार से प्रवासी भारतीयों का रोम-रोम पुलकित हो उठा। ऐसी सुनहरी यादें मिलीं जो उनके मन में रची-बसी रहेंगी। तीन दिन बाद विदाई बेला आई तो भावुक मेजबान चौखट पर विनम्रता से मेहमान को ताकते रहे। अपनत्व से अभिभूत अतिथियों की भी आंखें भर आईं। तीन दिन कैसे बीते, पता ही नहीं चला। तीन दिन तक उत्सव के रंग में रंगे ऐढ़े गांव, टेंट सिटी धीरे-धीरे फिर पुराने रूप में आ जाएगी, लेकिन जो अहसास मन में बसा, उसका रंग हमेशा चटख रहेगा। दुनिया के 90 देशों से आए इन खास मेहमानों ने इससे पहले कभी नगरी के दर्शन किए थे। कहीं काल भैरव के दर्शन का सुख तो कहीं सारनाथ की शांति का अहसास। संकट मोचन मंदिर, बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई और श्रीराम लीला के लिए प्रसिद्ध रामनगर देखा। गौरवान्वित मेहमान दिव्य गंगा आरती के भी साक्षी बने। नौका में बैठ राजघाट से अस्सी घाट तक काशी का सौंदर्य निहारा।
विज्ञापन

सम्मेलन में भाग लेने के बाद प्रवासी भारतीयों ने लौटते वक्त कहा कि पूर्वजों की माटी को नमन कर वह धन्य हो गए। गंगा मइया बुलाएंगी तो हम फिर आएंगे। लंदन से आए नैमे समीन ने कहा कि काशी आकर बहुत अच्छा लगा। अब तक सिर्फ सुना था, लेकिन ये काशी से उससे ज्यादा अलौकिक है। गंगा आरती तो लाजवाब है। स्विट्जरलैंड से आए सुनील ने कहा कि गंगा और गंगा आरती दोनों ही मन में बस गए। बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर तो धन्य हो गया। सारनाथ में महात्मा बुद्ध के दर्शन हुए। बहरीन की अनुरिता मृत्युंजय ने कहा कि हिंदुस्तान सच में महान है। यहां जो आजादी है, वो कहीं नहीं। बहरीन में लोग हमें हिंद और हिंदी कहकर बुलाते हैं। बहुत गर्व महसूस होता है। अबुधाबी से आए अभिलाष ने कहा कि यहां जो प्यार और सत्कार मिला, उसे शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता। यूएसए से आए अतुल अग्निहोत्री भी पहली बार काशी की धरती को नमन किया।
विज्ञापन

कोबीता ने 80, सुषमा ने 30 हजार की खरीदीं साड़ियां
वाराणसी। प्रवासी भारतीय सम्मेलन में आईं मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ की पत्नी कोबीता बुधवार सुबह करीब सवा ग्यारह बजे कटेहार स्थित साड़ी की दुकान पर पहुंची। करीब एक घंटे तक साड़ियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने तनछुई और कढ़वा बार्डर वाली कुल आठ साड़ियां खरीदी। इनकी कीमत 80 हजार रुपये है। वहीं, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तीन तनछुई बनारसी साड़ी खरीदी, इनकी कीमत 30 हजार रुपये है। यूएसए की दो, मॉरीशस की एक महिला ने भी यहीं से बनारसी साड़ियां खरीदी। साड़ी शो रूम के मालिक हाजी बदरुद्दीन ने बताया कि इन साड़ियों की कीमत दस हजार रुपये से शुरू होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed