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समरसता की दीवार को समृद्ध करती है बोली
Updated Wed, 26 Sep 2018 02:08 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केंद्र की ओर से मंगलवार को आयोजित विशेष व्याख्यान में वक्ताओं ने भोजपुरी भाषा की सामाजिकता और उसकी सांस्कृतिक उपलब्धियों पर चर्चा की। बतौर मुख्य वक्ता रांची विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि भोजपुरी की अस्मिता को हिंदी भाषी प्रदेश ने ठीक से समझा, इसी वजह से इसकी संस्कृति भी सामाजिक रही। बोली समरसता की दीवार को समृद्ध करती है।
व्याख्यान में प्रो. अरुण कुमार ने कहा कि बोली के रूप में भोजपुरी ग्रहणशील भाषा रही है। इस दौरान उन्होंने भोजपुरी सिनेमा के संदर्भ से भोजपुरी सांस्कृतिक विस्तार की भी चर्चा की। अध्यक्षता करते हुए केंद्र के समन्वयक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि भोजपुरी एक सजीव भाषा है, जिसके स्वभाव में ही बहु सांस्कृतिक बोध और सामाजिकता है। इसकी सांस्कृतिक बनावट में ही संश्लिष्टता और पारदर्शिता है। संचालन शोध छात्र दिवाकर तिवारी, स्वागत स्वाति सिंह और धन्यवाद ज्ञापन योगेश प्रताप सिंह ने किया। कार्यक्रम में शोध छात्रा चंदा देवी की ओर से भोजपुरी गीत की प्रस्तुति को सभी ने सराहा।
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व्याख्यान में प्रो. अरुण कुमार ने कहा कि बोली के रूप में भोजपुरी ग्रहणशील भाषा रही है। इस दौरान उन्होंने भोजपुरी सिनेमा के संदर्भ से भोजपुरी सांस्कृतिक विस्तार की भी चर्चा की। अध्यक्षता करते हुए केंद्र के समन्वयक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि भोजपुरी एक सजीव भाषा है, जिसके स्वभाव में ही बहु सांस्कृतिक बोध और सामाजिकता है। इसकी सांस्कृतिक बनावट में ही संश्लिष्टता और पारदर्शिता है। संचालन शोध छात्र दिवाकर तिवारी, स्वागत स्वाति सिंह और धन्यवाद ज्ञापन योगेश प्रताप सिंह ने किया। कार्यक्रम में शोध छात्रा चंदा देवी की ओर से भोजपुरी गीत की प्रस्तुति को सभी ने सराहा।
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