{"_id":"5b0c52334f1c1b9b6e8b50e9","slug":"91527534131-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"समन्वय बनाने की सीख देते हैं महादेव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समन्वय बनाने की सीख देते हैं महादेव
Updated Tue, 29 May 2018 12:32 AM IST
विज्ञापन
लालानगर। डीघ ब्लॉक के बेरासपुर गांव में गंगा तट स्थित बेरासनाथ मंदिर परिसर में पुरुषोत्तम मास में प्रवचन का आयोजन किया गया। इसमें पंडित सुभाष महराज ने सोमवार को भगवान शंकर की भक्ति एवं कृपा के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि परिवार में कैसे भी लोग हों, उन्हें एक बनाए रखना ही सच्चा मुखिया या गृहस्थ का कर्तव्य होता है। कहा कि भगवान के परिवार में शेर, बैल, चूहा, सांप, गंगा, चंदा समेत कई लोग हैं, लेकिन भगवान का समन्वय कभी बिगड़ता नहीं है। ऐसे में हमें भी अपने परिवार के समन्वय को बिगड़ने नहीं देना चाहिए। भले ही हमें दुख या हानि उठानी पड़े।
उन्होंने कहा कि भगवान शंकर की भक्ति बड़ी ही सहज और सरल है। बस सच्चे मन और भाव से भक्ति की जाए तो भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान शंकर ने तो राक्षसों की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें भी वरदान और अश्त्र-शस्त्र दे दिया। कहा कि भगवान शंकर ही ऐसे देव हैं, जिन्हें जो भी भाव से अर्पण करे, तुरंत स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन, यह ध्यान रहे कि भाव में भक्ति और प्रेम होना चाहिए। कहा कि भगवान जब कूपित होते हैं तो कोई नहीं रोक सकता है। इस मौके पर माता चरन मिश्र, राम सजीवन, श्यामधर, वकील समेत बड़ी संख्या में कथा प्रेमी मौजूद थे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि भगवान शंकर की भक्ति बड़ी ही सहज और सरल है। बस सच्चे मन और भाव से भक्ति की जाए तो भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान शंकर ने तो राक्षसों की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें भी वरदान और अश्त्र-शस्त्र दे दिया। कहा कि भगवान शंकर ही ऐसे देव हैं, जिन्हें जो भी भाव से अर्पण करे, तुरंत स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन, यह ध्यान रहे कि भाव में भक्ति और प्रेम होना चाहिए। कहा कि भगवान जब कूपित होते हैं तो कोई नहीं रोक सकता है। इस मौके पर माता चरन मिश्र, राम सजीवन, श्यामधर, वकील समेत बड़ी संख्या में कथा प्रेमी मौजूद थे।
विज्ञापन