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‘मैं’ और ‘तुम’ की भावना ही समस्याओं की जड़ : दलाई लामा
Updated Tue, 20 Mar 2018 02:24 AM IST
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वाराणसी। तिब्बती धर्मगुरु व शांति दूत दलाई लामा ने कहा कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान भावनाओं पर आधारित है। ‘मैं’ और ‘तुम’ की भावना ही आज तमाम समस्याओं की जड़ है। इसलिए भारत में वो शक्ति है जिससे कि वो पूरी दुनिया को शांति का संदेश दे सकता है। इस निधि का समावेश हमें आज की आधुनिक शिक्षा में करना होगा। इससे ही डर और क्रोध की जगह अहिंसा और करुणा स्थापित किया जा सकता है। इसलिए शिक्षा के मामले में भारत को यूरोप और अमेरिका की कॉपी करने ही जरूरत नहीं। तकनीकी और विज्ञान का इस्तेमाल आज हिंसा के लिए हो रहा है जो कि गलत है।
भारतीय विश्वविद्यालय संघ के तीन दिवसीय 92वें अधिवेशन में उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की अभूतपूर्व सभ्यता रही है। इसी सभ्यता के कारण भारत में बुद्ध और महावीर जैसे विचारक और अहिंसा के समर्थक हुए। हमें इसके मूलभूत सिद्धांतों को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा। अधिवेशन की अध्यक्षता भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष प्रो. पीबी शर्मा ने की। संघ के महासचिव प्रो. फुरकान कमर ने संघ व अधिवेशन के उद्देश्य के बारे में बताया। अधिवेशन में देश भर के 150 कुलपति व शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। स्वागत कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. आरके उपाध्याय ने किया।
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भारतीय विश्वविद्यालय संघ के तीन दिवसीय 92वें अधिवेशन में उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की अभूतपूर्व सभ्यता रही है। इसी सभ्यता के कारण भारत में बुद्ध और महावीर जैसे विचारक और अहिंसा के समर्थक हुए। हमें इसके मूलभूत सिद्धांतों को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा। अधिवेशन की अध्यक्षता भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष प्रो. पीबी शर्मा ने की। संघ के महासचिव प्रो. फुरकान कमर ने संघ व अधिवेशन के उद्देश्य के बारे में बताया। अधिवेशन में देश भर के 150 कुलपति व शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। स्वागत कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. आरके उपाध्याय ने किया।
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