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मुहब्बत और भाईचारा ही मुल्क की सबसे बड़ी पूंजी
Updated Sat, 06 Jan 2018 01:49 AM IST
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वाराणसी। हजरत भोले शाह दीवान बाबा का 249वां उर्स पूरी अकीदत के साथ शुक्रवार को मनाया गया। पीलीकोठी स्थित बाबा के आस्ताने पर उर्स में सांप्रदायिक सौहार्द का पैगाम देने के उद्देश्य से ‘पैगाम-ए-मुहब्बत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘पैगाम-ए-मुहब्बत’ की सदारत करते हुए मौलाना मकसूद अहमद कादरी ने कहा कि आपसी मुहब्बत और भाईचारा ही इस मुल्क की सबसे बड़ी पूंजी है। मास्टर मुश्ताक अहम शाह कादरी ने कहा कि किसी भी मुल्क के आगे बढ़ने के लिए तालीम भी बेहद जरूरी है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिक इसकी नजीर है।
डॉ. अफजल हुसैन ने कहा कि समाज में तमाम ऐसे लोग हैं जो मजहब के बने बनाए सांचे से बाहर निकलकर प्रेम और सौहार्द का पैगाम दिया। उन्होंने गो भक्त मोहम्मद फैज का उदाहरण दिया और कहा कि उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक सांप्रदायिक शांति का संदेश देने के लिए यात्रा की। इस मौके पर शायर सादिक बनारसी ने अपनी गजलों और नातों का नजराना पेश किया और खूब वाहवाही लूटी। इससे पहले उर्स का आगाज सुबह छह बजे कुरानख्वानी से हुआ। नौ बजे कुल शरीफ और फातिहाख्वानी हुई। शाम को चादर का जुलूस निकला, वहीं बाबा के गुस्ल की रस्म पूरी की गई।
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डॉ. अफजल हुसैन ने कहा कि समाज में तमाम ऐसे लोग हैं जो मजहब के बने बनाए सांचे से बाहर निकलकर प्रेम और सौहार्द का पैगाम दिया। उन्होंने गो भक्त मोहम्मद फैज का उदाहरण दिया और कहा कि उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक सांप्रदायिक शांति का संदेश देने के लिए यात्रा की। इस मौके पर शायर सादिक बनारसी ने अपनी गजलों और नातों का नजराना पेश किया और खूब वाहवाही लूटी। इससे पहले उर्स का आगाज सुबह छह बजे कुरानख्वानी से हुआ। नौ बजे कुल शरीफ और फातिहाख्वानी हुई। शाम को चादर का जुलूस निकला, वहीं बाबा के गुस्ल की रस्म पूरी की गई।
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