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भारत धर्म महामंडल में रार से स्थिति असहज
Updated Mon, 20 Nov 2017 02:06 AM IST
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वाराणसी। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के चयन को लेकर भारत धर्म महामंडल के समानांतर कमेटी के सक्रिय होने के बाद चिंता बढ़ गई है। डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी शंभूनाथ चतुर्वेदी की ओर से जारी किए गए 24 नवंबर के नेशनल कौंसिल की बैठक के एजेंडे को निरस्त करने का जानकारी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को दे दी गई है। ताकि इस धड़े की ओर से होने वाली मंत्री सभा की बैठक को अवैधानिक करार दिया जा सके।
शंकराचार्य चयन को लेकर भारत धर्म महामंडल में मचे घमासान से स्थिति असहज हो गई है। 11 अक्तूबर को इस मसले पर बुलाई गई पहली बैठक में हंगामे के बाद महामंडल की बैठक की अध्यक्षता को लेकर रार मच गई थी। तब महामंडल के अध्यक्ष रहे राय गिरीश चंद्र की अध्यक्षता में बैठक कराए जाने को लेकर हंगामा हुआ था। असमर्थता की वजह से गिरीश चंद्र उस दिन पदाधिकारियों के बीच न जाकर कार में ही बैठे-बैठे अध्यक्षता कर रहे थे। कुछ पदाधिकारियों का कहना था कि असमर्थ हो चुके गिरीश चंद्र की अध्यक्षता स्वीकार नहीं की जा सकती।
इस दौरान गिरीश चंद्र ने जनरल सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह को अध्यक्षता करने का अधिकार लिखित रूप से सौंपा और तब जनरल सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी लेकिन विरोध करने वाले पदाधिकारियों के हंगामे की वजह से हाथापाई होने लगी और फिर बैठक स्थगित करनी पड़ी। कहा जा रहा है कि उसी दिन दूसरे धड़े ने अलग रजिस्टर बनाकर बैठक की कार्यवाही पूरी कर ली थी।
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अब डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी शंभूनाथ चतुर्वेदी की ओर से 24 नवंबर की बैठक का जो एजेंडा जारी किया गया है उसमें क्रमांक एक पर पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि के बाद उसके अनुपालन में भारत धर्म महामंडल के द्वारा तीनों पीठों के शंकराचार्यों और काशी के प्रतिष्ठित विद्वानों से प्राप्त मत के अनुसार ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर अभिषेक कराने के लिए कार्यवाही पर विचार करने का प्रस्ताव लाया गया है।
उधर, जनरल सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह का कहना है कि संस्था विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों की कार्यवाही को अवैधानिक घोषित करते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को सूचित कर दिया गया है। उनकी नेशनल कौंसिल की बैठक का कोई मतलब नहीं है।
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शंकराचार्य चयन को लेकर भारत धर्म महामंडल में मचे घमासान से स्थिति असहज हो गई है। 11 अक्तूबर को इस मसले पर बुलाई गई पहली बैठक में हंगामे के बाद महामंडल की बैठक की अध्यक्षता को लेकर रार मच गई थी। तब महामंडल के अध्यक्ष रहे राय गिरीश चंद्र की अध्यक्षता में बैठक कराए जाने को लेकर हंगामा हुआ था। असमर्थता की वजह से गिरीश चंद्र उस दिन पदाधिकारियों के बीच न जाकर कार में ही बैठे-बैठे अध्यक्षता कर रहे थे। कुछ पदाधिकारियों का कहना था कि असमर्थ हो चुके गिरीश चंद्र की अध्यक्षता स्वीकार नहीं की जा सकती।
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इस दौरान गिरीश चंद्र ने जनरल सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह को अध्यक्षता करने का अधिकार लिखित रूप से सौंपा और तब जनरल सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी लेकिन विरोध करने वाले पदाधिकारियों के हंगामे की वजह से हाथापाई होने लगी और फिर बैठक स्थगित करनी पड़ी। कहा जा रहा है कि उसी दिन दूसरे धड़े ने अलग रजिस्टर बनाकर बैठक की कार्यवाही पूरी कर ली थी।
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अब डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी शंभूनाथ चतुर्वेदी की ओर से 24 नवंबर की बैठक का जो एजेंडा जारी किया गया है उसमें क्रमांक एक पर पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि के बाद उसके अनुपालन में भारत धर्म महामंडल के द्वारा तीनों पीठों के शंकराचार्यों और काशी के प्रतिष्ठित विद्वानों से प्राप्त मत के अनुसार ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर अभिषेक कराने के लिए कार्यवाही पर विचार करने का प्रस्ताव लाया गया है।
उधर, जनरल सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह का कहना है कि संस्था विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों की कार्यवाही को अवैधानिक घोषित करते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को सूचित कर दिया गया है। उनकी नेशनल कौंसिल की बैठक का कोई मतलब नहीं है।