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नैमिषारण्य में लगेंगे 88 हजार पौधे: वेद-पुराणों के अध्ययन से मिलेंगे त्रेता व द्वापर युग के वृक्ष, समिति गठित
Sat, 07 Jan 2023 10:40 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Sat, 07 Jan 2023 10:40 PM IST
सार
सीतापुर जिले में स्थित नैमिषारण्य तीर्थ में 88 हजार तरह के पौधे लगाने का निर्णय लिया गया है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने पौधों की खोज के लिए 26 सदस्यीय समिति का गठन किया है।
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संस्कृत विवि में बैठक में सीतापुर में पौधरोपण कराने का लिया गया था फैसला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
त्रेता और द्वापर युग में नैमिषारण्य में पाए जाने वाले 88 हजार वृक्षों को चिह्नित किया जाएगा। वेद और पुराण का अध्ययन करने के बाद ऋषियों की तपोस्थली पर इन वृक्षों को आम जनता भी देख सकेगी। वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने वृक्षों की खोज के लिए 26 सदस्यीय समिति का गठन किया है।
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कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि रामायण और महाभारत काल के वृक्षों पर शोध किया जाएगा। मत्स्य पुराण में अनेक प्रकार के वृक्षों की महिमा एवं सामाजिक जीवन के बारे में वर्णन है। सीतापुर में गोमती के किनारे नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों ने 88 हजार वृक्षों के नीचे तप किया था। इसमें नीम, आम, पीपल, बरगद, जामुन, पलाश, आंवला, खैर, पित्र पापड़ा, चंदन, चमेली, परवल, तेंदू, अर्जुन, मधुक (महुआ), कदंब, इमली, शमी, सुपारी, पनस, मर्कटी, जयंत करवीर, बेल आदि वृक्ष शामिल हैं।
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ये हैं समिति के सदस्य
कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में बनाई गई समिति में पद्मभूषण प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, बीएचयू के प्रो. कृष्णकांत शर्मा, प्रो. हृदय रंजन शर्मा, प्रो. गोपबंधु मिश्र, प्रो. गंगाधर पंडा, प्रो. श्याम बापट, प्रो. मखलेश उपाध्याय, प्रो. शीतला प्रसाद शुक्ल, प्रो. हरिशंकर पांडेय, प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो. सुधाकर मिश्रा, प्रो. कमलाकांत त्रिपाठी, प्रो. हीरककांति चक्रवर्ती, प्रो. राजनाथ, प्रो. रामनारायण द्विवेदी, प्रो. विजय कुमार पांडेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. रविशंकर पांडेय, प्रभारी निदेशक सामाजिक वानिकी वन प्रभाग सीतापुर बृजमोहन शुक्ल, वनाधिकारी सीतापुर ब्रजेश पांडेय, अनिल किंजवेकर आदि शामिल हैं।
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