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पशुधन प्रक्षेत्र की दुर्दशा देख सचिव भड़के
Updated Wed, 28 Jun 2017 02:03 AM IST
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आराजीलाइन। पशुपालन डेयरी एवं मत्स्य पालन के केंद्रीय सचिव देवेंद्र चौधरी मंगलवार को शाहंशाहपुर स्थित पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां प्रक्षेत्र की दुर्दशा देख सचिव भड़क गए। करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी पशुओं का रखरखाव अत्यंत खराब होने, दुग्ध उत्पादन बहुत कम होने पर उन्होंने पशुधन और पशुपालन विभाग के अधिकारियों को खूब खरी-खोटी सुनाई। कहा कि जो प्रक्षेत्र खुद को नहीं संभाल पा रहा, वह किसानों की आमदनी बढ़ाने में कैसे मददगार साबित होगा।
सचिव ने प्रक्षेत्र में मौजूद गंगातीरी गायों, सांड़ों और किसानों में बाटे गए पशुओं का विवरण प्राप्त किया। साथ ही प्रक्षेत्र की 78 एकड़ जमीन पर चारे, जई के बीज उत्पादन और गोबर के प्रयोग आदि के बारे में जानकारी ली। पता चला कि प्रक्षेत्र में तीन वर्षों में गंगातीरी नस्ल के केवल 38 सांड़ तैयार किए जा सके हैं। यहां कुल 81 गायें मौजूद हैं, जिनमें कुल 49 ही दूध देती हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया कि एक साल में मात्र 57000 लीटर दूध का उत्पादन हुआ है, जिसकी कीमत करीब 15 लाख रुपये है। इस पर उन्होंने खासी नाराजगी जताई। कहा कि केंद्र सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन दुग्ध उत्पादन केवल 15 लाख का हो रहा है। कहा कि साल भर के बिजली के बिल के बराबर भी यह प्रक्षेत्र आमदनी नहीं कर पाता। इतना ही नहीं, कहा गंगातीरी गायें मुहैया करा कर किसानों की आमदनी बढ़ाना इस प्रक्षेत्र का लक्ष्य है लेकिन ऐसी हालत में यह संभव नहीं दिख रहा। सचिव ने कहा कि पशुधन प्रक्षेत्र की हालत बहुत खराब है। उनके साथ मत्स्य विभाग के उप निदेशक डॉ. केदारनाथ, अपर निदेशक मुकेश कुमार सारंग, उप निदेशक पशुपालन जेपी सिंह, प्रसार अधिकारी मत्स्य डॉ. अजय सिंह, विश्वनाथ सिंह, संजीव, विकास आयुक्त राजीव बनकटा और बीडीओ आराजीलाइन हेमंत सिंह मौजूद थे।
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सचिव ने प्रक्षेत्र में मौजूद गंगातीरी गायों, सांड़ों और किसानों में बाटे गए पशुओं का विवरण प्राप्त किया। साथ ही प्रक्षेत्र की 78 एकड़ जमीन पर चारे, जई के बीज उत्पादन और गोबर के प्रयोग आदि के बारे में जानकारी ली। पता चला कि प्रक्षेत्र में तीन वर्षों में गंगातीरी नस्ल के केवल 38 सांड़ तैयार किए जा सके हैं। यहां कुल 81 गायें मौजूद हैं, जिनमें कुल 49 ही दूध देती हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया कि एक साल में मात्र 57000 लीटर दूध का उत्पादन हुआ है, जिसकी कीमत करीब 15 लाख रुपये है। इस पर उन्होंने खासी नाराजगी जताई। कहा कि केंद्र सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन दुग्ध उत्पादन केवल 15 लाख का हो रहा है। कहा कि साल भर के बिजली के बिल के बराबर भी यह प्रक्षेत्र आमदनी नहीं कर पाता। इतना ही नहीं, कहा गंगातीरी गायें मुहैया करा कर किसानों की आमदनी बढ़ाना इस प्रक्षेत्र का लक्ष्य है लेकिन ऐसी हालत में यह संभव नहीं दिख रहा। सचिव ने कहा कि पशुधन प्रक्षेत्र की हालत बहुत खराब है। उनके साथ मत्स्य विभाग के उप निदेशक डॉ. केदारनाथ, अपर निदेशक मुकेश कुमार सारंग, उप निदेशक पशुपालन जेपी सिंह, प्रसार अधिकारी मत्स्य डॉ. अजय सिंह, विश्वनाथ सिंह, संजीव, विकास आयुक्त राजीव बनकटा और बीडीओ आराजीलाइन हेमंत सिंह मौजूद थे।
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