SIR Voter List: 14 बीएलओ में बंटे 80 फॉर्म 6, मतदाताओं को करानी पड़ी फोटो कॉपी; बेटे का नाम खोजते रहे पिता
एसआईआर में संशोधन कार्य को लेकर कई स्थानों पर कैंप लगाए गए। इसमें काफी शिकायतें लेकर मतदाता पहुंचे। बीएलओ और बीएलए ने उनकी समस्याओं को सुना और समाधान करने का आश्वासन दिया।
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मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और संशोधन कार्य के तहत रविवार को जिले के विभिन्न मतदान केंद्रों पर विशेष कैंप लगाए गए। रामनगर में फॉर्म-6 (मतदाता सूची में नाम जोड़ने का फाॅर्म) की कमी सबसे बड़ी समस्या बनी। बीएलओ सुपरवाइजर मंजू के अनुसार कुल 80 फॉर्म ही मिले, जिन्हें 14 बीएलओ में वितरित कर दिया गया।
इसके बाद फॉर्म लेने पहुंचे लोगों को फोटो कॉपी कराने की सलाह दी गई। वहीं, लोहता क्षेत्र के सिरसा, कोटवा, महमूदपुर और कोरौता स्थित बूथों पर कई ऐसे मामले सामने आए जहां पिता अपने बाहर नौकरी कर रहे बेटों का नाम मतदाता सूची में खोजते रहे लेकिन नहीं मिला। इससे वे परेशान दिखे।
लोहता निवासी असलम ने बताया कि उनका बेटा मुंबई में काम करता है। उसका नाम वोटर लिस्ट से गायब है। नाम जुड़वाने के लिए वे बार-बार बूथ का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही। इसी तरह कोटवा निवासी इम्तियाज ने बताया कि उनके बेटे अनवर अली का नाम भी मतदाता सूची में नहीं है। नाम जुड़वाने के लिए कई बार बूथ पर गए, लेकिन हर बार कोई न कोई समस्या सामने आ जा रही है।
29 लोगों को नोटिस, प्रमाण पत्र नहीं मिले तो नाम सूची से बाहर होगा
सारनाथ के पतेरवा प्राइमरी विद्यालय में बने बूथ पर 2003 की जनगणना के बाद निवास परिवर्तन के मामलों में 29 लोगों को नोटिस जारी किया गया। इन लोगों को जन्म प्रमाणपत्र, हाईस्कूल की मार्कशीट, कुटुंब रजिस्टर की प्रति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
कहा गया कि प्रमाणपत्र नहीं मिले तो नाम सूची से बाहर किए जाएंगे। कंपोजिट विद्यालय धौरहरा के बीएलओ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि कई घरों के मुखिया आधार कार्ड, हाईस्कूल का अंकपत्र सहित अन्य सरकारी दस्तावेज लेकर पहुंचे लेकिन कुछ मामलों में साक्ष्य के सत्यापन नहीं हो सके। श्रीकुबेर जूनियर हाई स्कूल नेवादा स्थित मतदान केंद्र पर मतदाताओं ने दूसरे मतदान केंद्र में नाम ट्रांसफर कराने और सूची में नाम न होने पर फॉर्म-6 भरने के लिए आवेदन किया।
रोहनिया क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय दरेखू और जगतपुर इंटर कॉलेज में बीएलओ ने फॉर्म-6 के माध्यम से नए नाम जोड़ने और मैपिंग संबंधी त्रुटियों को ठीक कराया। यहां बीएलओ सरिता पाल, सरिता विश्वकर्मा, अंजू देवी और रुखसार ने बैठकर आवेदन भरवाए। गोपी, नजरुल और चंदन पटेल ने नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया, जबकि संदीप कुमार और राजेंद्र कुमार नोटिस पर मैपिंग कराने पहुंचे।
जगतपुर इंटर कॉलेज में बीएलओ शिवकुमार ने बताया छह लोगों के फॉर्म-6 भरे गए हैं। कछवा रोड सेवापुरी ब्लॉक के ठटरा पूर्व माध्यमिक विद्यालय में विशेष कैंप के दौरान आठ बूथों पर आठ बीएलओ मौजूद रहे। यहां 2003 की मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद दस्तावेज न दे पाने के कारण एसआईआर से वंचित रहे मतदाता नाम शामिल कराने पहुंचे।
बूथ संख्या 39 पर धरकार और दूसरे समाज के मतदाताओं सहित कुल 77 मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो सकी। निरीक्षण के दौरान पहुंचे खंड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार यादव ने बताया कि महिलाओं को मायके की 2003 की मतदाता सूची में माता-पिता का नाम होना चाहिए। 1987 के पहले का कोई सरकारी दस्तावेज नोटिस के साथ बीएलओ को देना होगा।
छूटे मतदाताओं को 21 जनवरी तक भेजा जाएगा नोटिस
एसआईआर से छूटे मतदाताओं को 21 जनवरी से नोटिस भेजा जाएगा। 27 जनवरी तक दस्तावेज के साथ उपस्थित होना होगा। ग्राम पंचायत चुनाव के लिए ठटरा गांव के 8755 मतदाताओं में से 3600 डुप्लीकेट मतदाताओं के सत्यापन के लिए आधार नंबर लिंक कराए गए। चित्रसेनपुर, गुड़िया, बिहड़ा, पुरे छतेरी शाहिद सहित अन्य गांवों में भी बीएलओ ने विशेष कैंप लगाए। सेवापुरी विकासखंड के ग्राम पंचायत बेसहूपुर में बीएलओ द्वारा फॉर्म-6, 7 और 8 भरने का कार्य जारी रहा।
फॉर्म-6 की रिसीविंग को लेकर हुआ विवाद
मिर्जामुराद के जूनियर हाई स्कूल स्थित बूथ पर उस समय विवाद की स्थिति बन गई जब नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 लेकर पहुंचे लोगों ने बीएलओ से रिसीविंग की मांग की। इस पर बीएलओ ने कहा कि फॉर्म-6 की रिसीविंग नहीं दी जाएगी बल्कि प्रमाण के तौर पर भरे गए फॉर्म की फोटो रख ली जाए।
इधर नाम में त्रुटि सुधार के लिए फॉर्म-8 लेकर पहुंचे ग्राम गौर निवासी एवं बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. उधम सिंह गौतम ने अपना फॉर्म-8 संबंधित बीएलओ सुनील कुमार को सौंपा। मतदाता सूची में नाम न मिलने और प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी न होने से लोगों में नाराजगी दिखी। कई लोगों ने कहा कि बाहर नौकरी करने वाले युवाओं के नाम हटने से उनके मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।