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विशेष शिक्षा में क्रियात्मक शोध पर जोर देना होगा
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वाराणसी। कमच्छा स्थित बीएचयू शिक्षा संकाय में शोध विधि पर पांच दिवसीय पुनश्चर्या पाठ्यक्रम का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। पहले दिन वक्ताओं ने विशेष शिक्षा में क्रियात्मक शोध पर जोर देने का आह्वान किया। बतौर मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो. केपी पांडेय ने कहा कि विशेष शिक्षा के बारे में प्रोजेक्ट कार्य और क्रियात्मक शोध जरूरी है।
प्रतिभागियों को शोध कार्य से जुड़ी अहम जानकारियां देते हुए प्रो. पांडेय ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जाना सराहनीय है। समन्वयक डॉ. योगेंद्र पांडेय ने बताया कि पुनर्वास के क्षेत्र में कई नीतियां एवं योजनाएं चल रही है। दिव्यांगजनों के शैक्षिक, आर्थिक, रोजगार, पुनर्वास आदि में समस्याओं और चुनौतियों को उचित शोध विधि से हल किया जा सकता है। संकाय प्रमुख प्रो. राजेश प्रसाद शुक्ल ने कहा कि शोध से प्राप्त ज्ञान को जानना ही नहीं, बल्कि शोध से प्राप्त ज्ञान का व्यवहारिक उपयोग भी करना चाहिए। कार्यक्रम में प्रो. विनय कुमार सिंह, डॉ. तुलसी, प्रो. अंजलि बाजपेयी, प्रो. सुनील सिंह, प्रो. नागेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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प्रतिभागियों को शोध कार्य से जुड़ी अहम जानकारियां देते हुए प्रो. पांडेय ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जाना सराहनीय है। समन्वयक डॉ. योगेंद्र पांडेय ने बताया कि पुनर्वास के क्षेत्र में कई नीतियां एवं योजनाएं चल रही है। दिव्यांगजनों के शैक्षिक, आर्थिक, रोजगार, पुनर्वास आदि में समस्याओं और चुनौतियों को उचित शोध विधि से हल किया जा सकता है। संकाय प्रमुख प्रो. राजेश प्रसाद शुक्ल ने कहा कि शोध से प्राप्त ज्ञान को जानना ही नहीं, बल्कि शोध से प्राप्त ज्ञान का व्यवहारिक उपयोग भी करना चाहिए। कार्यक्रम में प्रो. विनय कुमार सिंह, डॉ. तुलसी, प्रो. अंजलि बाजपेयी, प्रो. सुनील सिंह, प्रो. नागेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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