{"_id":"5c647fbebdec2259e364ede5","slug":"71550090174-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल, ठेकों और होटलों से वसूले जाएंगे तीन करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पताल, ठेकों और होटलों से वसूले जाएंगे तीन करोड़
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। नगर निगम अधिनियम की अनदेखी के चलते नगर निगम को प्रति वर्ष तीन करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व का नुकसान हो रहा है। हालांकि आय बढ़ाने के लिए तलाशे गए नए स्रोतों के तहत अब निगम की ओर से होटल, लॉन, ठेका और अस्पतालों सहित 15500 लोगों को बिल जारी किया गया है। इन सभी से 31 मार्च तक वसूली की जानी है। वैसे, पहले से ही निगम में रजिस्टर्ड और चिह्नित 6292 संस्थानों से भी वसूली नहीं की जा रही है।
निगम के पास आय के संसाधनों की कमी नहीं है लेकिन इन संसाधनों से वसूली के साथ ही बकाए की वसूली नहीं कर पा रहा है। मानकों के मुताबिक 20 लाख की आबादी वाले शहर से कम से कम 60 करोड़ रुपये की आय होनी चाहिए। दूसरी ओर निगम 38 करोड़ रुपये की वसूली पर अटका है। आय में पिछड़ने और खर्च में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के चलते अब निगम आय के नए स्रोत तलाश रहा है। इसमें पता चला कि अस्पतालों, होटल, गेस्ट हाउस, देशी-विदेशी शराब के ठेके के अलावा मॉडल शॉप, ज्वलनशील पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों सहित स्कूल और सिटी बसों को भी आय बढ़ाने के दायरे में लाया गया है। इसके लिए निगम ने सर्वे कराकर अलग-अलग जोन का रिकार्ड तैयार कराया। इसके बाद इनको बिल बनाकर भेजे गए हैं, जिन्हें 31 मार्च तक जमा करने का आदेश जारी किया गया है।
विज्ञापन
निगम के पास आय के संसाधनों की कमी नहीं है लेकिन इन संसाधनों से वसूली के साथ ही बकाए की वसूली नहीं कर पा रहा है। मानकों के मुताबिक 20 लाख की आबादी वाले शहर से कम से कम 60 करोड़ रुपये की आय होनी चाहिए। दूसरी ओर निगम 38 करोड़ रुपये की वसूली पर अटका है। आय में पिछड़ने और खर्च में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के चलते अब निगम आय के नए स्रोत तलाश रहा है। इसमें पता चला कि अस्पतालों, होटल, गेस्ट हाउस, देशी-विदेशी शराब के ठेके के अलावा मॉडल शॉप, ज्वलनशील पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों सहित स्कूल और सिटी बसों को भी आय बढ़ाने के दायरे में लाया गया है। इसके लिए निगम ने सर्वे कराकर अलग-अलग जोन का रिकार्ड तैयार कराया। इसके बाद इनको बिल बनाकर भेजे गए हैं, जिन्हें 31 मार्च तक जमा करने का आदेश जारी किया गया है।
विज्ञापन