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सांसद आदर्श गांव में समस्याओं का अंबार
Updated Tue, 04 Sep 2018 01:12 AM IST
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कौलापुर। सांसद आदर्श गांव कौलापुर में विकास के सूरत को जल निकासी बिगाड़ रही है। विकास कार्यों में जल निकासी कोढ़ बन गई है। इससे बारिश के साथ ही घरों से निकलने वाला पानी मार्गों पर फैल जाता है। उससे उठने वाली दुर्गंध से लोगों का जीना मुहाल हो जाता है। कुपोषण मिशन के तहत बच्चों कुपोषण मुक्त नहीं हो सके। चार केंद्रों पर अब भी 30 से अधिक बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।
जिले के चर्चित गांवों में शामिल कौलापुर को 2015 में सांसद वीरेंद्र सिंह ने गोद लिया। उसके बाद अलग-अलग निधियों से गांव में कई विकास कार्य कराए गए। पोषण मिशन के तहत 2017 में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आरबी मौर्य ने गांव को गोद लिया लेकिन वर्तमान में यहां कुपोषित बच्चों की संख्या हैरान करने वाली है। चार आंगनबाड़ी केंद्रों पर 30 से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। गांव में 150 हैंडपंप, 130 से अधिक सोलर लाइट लगवाया गया। डाकखाना और सामुदायिक भवन तीन साल पूर्व से प्रस्तावित है, लेकिन अब तक नहीं बन सका। पेयजल व्यवस्था को बेहतर करने के लिए करीब दो करोड़ की लागत से पेयजल टंकी बनाई गई लेकिन हर घर तक सप्लाई नहीं पहुंच सकी। गांव की सबसे बड़ी समस्या जल निकासी की है। नाली न होने से जगह-जगह जल जमाव की समस्या बन गई है। चकबिजई बस्ती में पेयजल टंकी की पाइपलाइन बिछाने के लिए खुदाई कर छोड़ा गया है। इससे हर रोज सैकड़ो लीटर पानी बर्बाद होता है। दलित बस्ती में आज तक पानी की सप्लाई नहीं हो सकी है। करीब पांच हजार की आबादी वाले गांव में 2400 से अधिक वोटर हैं। गांव में चार आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 125 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। सभी केंद्रों पर मिलाकर 30 से अधिक बच्चे कुपोषित हैं।
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जिले के चर्चित गांवों में शामिल कौलापुर को 2015 में सांसद वीरेंद्र सिंह ने गोद लिया। उसके बाद अलग-अलग निधियों से गांव में कई विकास कार्य कराए गए। पोषण मिशन के तहत 2017 में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आरबी मौर्य ने गांव को गोद लिया लेकिन वर्तमान में यहां कुपोषित बच्चों की संख्या हैरान करने वाली है। चार आंगनबाड़ी केंद्रों पर 30 से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। गांव में 150 हैंडपंप, 130 से अधिक सोलर लाइट लगवाया गया। डाकखाना और सामुदायिक भवन तीन साल पूर्व से प्रस्तावित है, लेकिन अब तक नहीं बन सका। पेयजल व्यवस्था को बेहतर करने के लिए करीब दो करोड़ की लागत से पेयजल टंकी बनाई गई लेकिन हर घर तक सप्लाई नहीं पहुंच सकी। गांव की सबसे बड़ी समस्या जल निकासी की है। नाली न होने से जगह-जगह जल जमाव की समस्या बन गई है। चकबिजई बस्ती में पेयजल टंकी की पाइपलाइन बिछाने के लिए खुदाई कर छोड़ा गया है। इससे हर रोज सैकड़ो लीटर पानी बर्बाद होता है। दलित बस्ती में आज तक पानी की सप्लाई नहीं हो सकी है। करीब पांच हजार की आबादी वाले गांव में 2400 से अधिक वोटर हैं। गांव में चार आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 125 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। सभी केंद्रों पर मिलाकर 30 से अधिक बच्चे कुपोषित हैं।
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