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होली पर उड़े मस्ती और उल्लास के रंग
Updated Sun, 04 Mar 2018 01:24 AM IST
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ज्ञानपुर। रंगों का पर्व होली जिले में उल्लास पूर्वक मनाया गया। शुक्रवार को रंगोत्सव के दिन लोगों में मस्ती सिर चढ़कर बोली। दोपहर तक रंग खेलने के बाद अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामना देने का सिलसिला शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। इस दौरान जगह-जगह डीजे की धुन पर लोग थिरकते नजर आए। गावों में ढोल-मजीरे संग होरियारों की टोली ने घर-घर जाकर फाग गए।
कालीन नगरी में होली परंपरागत तरीके से मनाई गई। बृहस्पतिवार शाम को आठ बजे से 10 बजे तक जगह-जगह हालिकाएं दहन हुई तो लोगों ने इसकी किदवंतिया सुनाई। अगले दिन शुक्रवार को होली का उल्लास रंगो के साथ मिलकर चटख हो गई। गांव-गांव, गली-गली और हर नुक्कड़ पर होली की उमंग छाई रही। जिला मुख्यालय ज्ञानपुर समेत गोपीगंज, औराई, जंगीगंज, सीतामढ़ी, सुरियावां, मोढ़, चौरी, महराजगंज और बाबूसराय समेत अन्य इलाकों में जमकर होली खेली गई। बच्चे पिचकारी में रंग भरकर आते-जाते लोगों पर डालते रहे। इस दौरान बुरा न मानो होली है कि नारे भी लगाए जा रहे थे। जगह-जगह सार्वजनिक स्थानों पर ठंडई एवं सरबत की व्यवस्था भी की गई थी। होरियारे इन स्थानों पर गला तर करने के बाद ही आगे बढ़ रहे थे। दोपहर दो बजे तक रंगों के साथ होली खेलकर मदमस्त रहे होरियारे अबीर-गुलाल लगाकर लोगों का आशीर्वाद लिया। इस दौरान लोगों ने एक दूसरे के गले मिलकर होली की शुभकामना दी। पर्व पर कई स्थानों पर गंगा जमुनी तहजीब भी जीवंत होती दिखी। विभिन्न वर्ग के लोगों को बुलाकर गुझिया और पकवान से मेहमान नवाजी की गई। ग्रामीण इलाकों में फाग गाने का सिलसिला भी चलता रहा। ढोल-मजीरे के साथ होरियारे घर-घर जाकर होली के गीत जोगिरा... सरारा.... आदि गाए।
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कालीन नगरी में होली परंपरागत तरीके से मनाई गई। बृहस्पतिवार शाम को आठ बजे से 10 बजे तक जगह-जगह हालिकाएं दहन हुई तो लोगों ने इसकी किदवंतिया सुनाई। अगले दिन शुक्रवार को होली का उल्लास रंगो के साथ मिलकर चटख हो गई। गांव-गांव, गली-गली और हर नुक्कड़ पर होली की उमंग छाई रही। जिला मुख्यालय ज्ञानपुर समेत गोपीगंज, औराई, जंगीगंज, सीतामढ़ी, सुरियावां, मोढ़, चौरी, महराजगंज और बाबूसराय समेत अन्य इलाकों में जमकर होली खेली गई। बच्चे पिचकारी में रंग भरकर आते-जाते लोगों पर डालते रहे। इस दौरान बुरा न मानो होली है कि नारे भी लगाए जा रहे थे। जगह-जगह सार्वजनिक स्थानों पर ठंडई एवं सरबत की व्यवस्था भी की गई थी। होरियारे इन स्थानों पर गला तर करने के बाद ही आगे बढ़ रहे थे। दोपहर दो बजे तक रंगों के साथ होली खेलकर मदमस्त रहे होरियारे अबीर-गुलाल लगाकर लोगों का आशीर्वाद लिया। इस दौरान लोगों ने एक दूसरे के गले मिलकर होली की शुभकामना दी। पर्व पर कई स्थानों पर गंगा जमुनी तहजीब भी जीवंत होती दिखी। विभिन्न वर्ग के लोगों को बुलाकर गुझिया और पकवान से मेहमान नवाजी की गई। ग्रामीण इलाकों में फाग गाने का सिलसिला भी चलता रहा। ढोल-मजीरे के साथ होरियारे घर-घर जाकर होली के गीत जोगिरा... सरारा.... आदि गाए।
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