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तीन क्लस्टर उत्पाद को बनाएंगे ‘नो इफेक्ट नो डिफेक्ट’
Updated Mon, 05 Feb 2018 02:20 AM IST
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वाराणसी। भारत सहित दुनिया के अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा करने और ग्लास बीड्स और बुनकरी से जुड़े उद्यमियों के उत्पादों को ‘जीरो इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट’ श्रेणी में लाने के लिए तीन क्लस्टर को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है। 36.39 करोड़ रुपये से दो क्लस्टर वाराणसी में और एक सोनभद्र में खोला जाएगा। इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
एक हाईटेक सिल्क वीविंग एंड डिजाइनिंग क्लस्टर के तहत लोहता में कॉमन फैसिलिटी सेंटर खुलेगा। इसमें हाईटेक लूम्स, डिजाइनिंग, डाइंग आदि की सुविधा मिलेगी। यहां क्लस्टर से 23 उद्यमी सहित बुनकरों को फायदा मिलेगा। इस पर 13 करोड़ 85 लाख खर्च आएगा। इसकी कवायद शुरू हो गई है।
दूसरा क्लस्टर ग्लास बीड्स का है। इसके तहत रोहनिया के समीप 14 करोड़ 82 लाख रुपये से क्वालिटी इंप्रूव सेंटर खुलेगा। यहां शीशे की रॉड को बीड्स में बदला जाएगा। इस क्लस्टर में 97 लोग शामिल हैं। ग्लास बीड्स के लिए मशीनरी के लिए ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा घोरावल (सोनभद्र) में सात करोड़ 72 लाख से घोरावल क्लस्टर प्राइवेट लिमिटेड के लिए सीएफसी खोला जाएगा। इससे 28 लोग जुड़े हैं। यहां कॉलीन सहित अन्य बुनकरी से जुड़ी वस्तुओं को विश्वस्तरीय किया जाएगा। बता दें कि क्लस्टर को मिलने वाली सुविधा पर आने वाले खर्च का 70 प्रतिशत धन भारत सरकार व बाकी 30 प्रतिशत क्लस्टर से जुड़े उद्यमी देंगे। सीडीओ (क्लस्टर डेवलपमेंट ऑफिसर) व उप निदेशक एमएसएमई इलाहाबाद आईबी सिंह ने बताया कि इसकी सहायता से उद्यमी अपने उत्पाद को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित कर सकते हैं।
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एक हाईटेक सिल्क वीविंग एंड डिजाइनिंग क्लस्टर के तहत लोहता में कॉमन फैसिलिटी सेंटर खुलेगा। इसमें हाईटेक लूम्स, डिजाइनिंग, डाइंग आदि की सुविधा मिलेगी। यहां क्लस्टर से 23 उद्यमी सहित बुनकरों को फायदा मिलेगा। इस पर 13 करोड़ 85 लाख खर्च आएगा। इसकी कवायद शुरू हो गई है।
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दूसरा क्लस्टर ग्लास बीड्स का है। इसके तहत रोहनिया के समीप 14 करोड़ 82 लाख रुपये से क्वालिटी इंप्रूव सेंटर खुलेगा। यहां शीशे की रॉड को बीड्स में बदला जाएगा। इस क्लस्टर में 97 लोग शामिल हैं। ग्लास बीड्स के लिए मशीनरी के लिए ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा घोरावल (सोनभद्र) में सात करोड़ 72 लाख से घोरावल क्लस्टर प्राइवेट लिमिटेड के लिए सीएफसी खोला जाएगा। इससे 28 लोग जुड़े हैं। यहां कॉलीन सहित अन्य बुनकरी से जुड़ी वस्तुओं को विश्वस्तरीय किया जाएगा। बता दें कि क्लस्टर को मिलने वाली सुविधा पर आने वाले खर्च का 70 प्रतिशत धन भारत सरकार व बाकी 30 प्रतिशत क्लस्टर से जुड़े उद्यमी देंगे। सीडीओ (क्लस्टर डेवलपमेंट ऑफिसर) व उप निदेशक एमएसएमई इलाहाबाद आईबी सिंह ने बताया कि इसकी सहायता से उद्यमी अपने उत्पाद को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित कर सकते हैं।
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