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33 एकड़ में बनेगा फ्रेट विलेज
Updated Wed, 24 Jan 2018 02:20 AM IST
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वाराणसी। केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग, जहाजरानी, रसायन एवं उर्वरक राज्यमंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कहा कि वाराणसी में 33 एकड़ में फ्रेट विलेज और लॉजिस्टिक हब का निर्माण कराया जाएगा। एक साल में इसका डीपीआर बन जाएगा। अगले दो-तीन साल में इसके बनने की उम्मीद है। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में मांडविया ने कहा कि योजना के मूर्त रूप लेने पर वाराणसी के विकास को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।
मांडविया ने दावा किया कि एशिया में अपनी तरह का यह पहला फ्रेट विलेज होगा। बताया कि फ्रेट विलेज और लॉजिस्टिक हब स्थापित होने के बाद रेल, सड़क और परिवहन तंत्र विकसित होगा। परिवहन लागत कम होगी और समय भी कम लगेगा। साथ ही कारोबारी सुविधाओं में भी सुधार होगा।
बताया, रामनगर में 169.70 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी मॉडल टर्मिनल का निर्माण कार्य चल रहा है। इसकी क्षमता 0.59 मिलियन टन प्रति वर्ष होगी। इसका निर्माण नवंबर, 2018 तक पूरा हो जाएगा। जानकारी दी कि वाराणसी में सात राष्ट्रीय राजमार्ग पर 363 किलोमीटर पर काम चल रहा है। इसकी लागत 5207 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 5764 करोड़ की लागत वाली 168 किलोमीटर की दो सड़क परियोजनाएं प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि सरकार ने विश्व बैंक के तकनीकी और वित्तीय सहयोग से जलमार्ग विकास परियोजना की शुरुआत की है। इससे हल्दिया से वाराणसी (1390 किलोमीटर) तक राष्ट्रीय जलमार्ग में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके गी। इस कार्य की अनुमानित लागत 5369 करोड़ है। परियोजना के 2022-23 तक पूरा होने की उम्मीद है। कहा, जल परिवहन के लिए जल्द ही गंगा में ड्रेजिंग होगी। इसके लिए तीन मीटर गहराई की जरूरत है।
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जमीन अधिग्रहण के मामले 15 दिन में सुलझाएं
रामनगर। मांडविया ने मंगलवार को यहां निर्माणाधीन मल्टी मॉडल टर्मिनल और इसके विस्तारीकरण का जायजा लिया। उन्होंने वाराणसी व चंदौली के जिलाधिकारियों को आदेश दिया कि टर्मिनल को रोड व रेल से जोड़ने वाले मार्ग के लिए आवश्यक जमीन के अधिग्रहण के मामले 15 दिन के अंदर सुलझाएं। राज्यमंत्री ने कहा कि यदि मामला नहीं सुलझा तो फिर वह अपने स्तर से कार्रवाई करेंगे।
करीब पौने दस बजे भीटी बंदरगाह पहुंचे राज्यमंत्री ने रामनगर-हल्दिया के बीच जल परिवहन योजना में आने वाली दुश्वारियों पर विचार विमर्श किया गया। इसके बाद निर्माणाधीन बंदरगाह का सर्वे किया तथा रेल और रोड को जोड़ने में आ रही समस्या से अवगत कराया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बावजूद यह मामला अभी तक सुलझाया नही जा सका है। इसके चलते योजना की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कुछ भूमिधर अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं है। इससे रेलवे लाइन और रोड का काम बाधित हो रहा है। अभी बंदरगाह का 53 प्रतिशत ही हो पाया है। राज्यमंत्री ने शेष कार्य नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य दिया है।
उनके साथ इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया, पटना के निदेशक रविकांत, डीएम वाराणसी योगेश्वर राम मिश्र, डीएम चंदौली हेमंत कुमार, एसडीएम सदर सुनील वर्मा, सीडीओ सुनील कुमार वर्मा, एसडीएम चंदौली दीप्ति देव, प्रोजेक्ट मैनेजर योगानंद, प्लानिंग मैनेजर अतुल पांचा के साथ राजमार्ग व जल परिवहन के मुद्दों पर समीक्षा की।
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मांडविया ने दावा किया कि एशिया में अपनी तरह का यह पहला फ्रेट विलेज होगा। बताया कि फ्रेट विलेज और लॉजिस्टिक हब स्थापित होने के बाद रेल, सड़क और परिवहन तंत्र विकसित होगा। परिवहन लागत कम होगी और समय भी कम लगेगा। साथ ही कारोबारी सुविधाओं में भी सुधार होगा।
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बताया, रामनगर में 169.70 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी मॉडल टर्मिनल का निर्माण कार्य चल रहा है। इसकी क्षमता 0.59 मिलियन टन प्रति वर्ष होगी। इसका निर्माण नवंबर, 2018 तक पूरा हो जाएगा। जानकारी दी कि वाराणसी में सात राष्ट्रीय राजमार्ग पर 363 किलोमीटर पर काम चल रहा है। इसकी लागत 5207 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 5764 करोड़ की लागत वाली 168 किलोमीटर की दो सड़क परियोजनाएं प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि सरकार ने विश्व बैंक के तकनीकी और वित्तीय सहयोग से जलमार्ग विकास परियोजना की शुरुआत की है। इससे हल्दिया से वाराणसी (1390 किलोमीटर) तक राष्ट्रीय जलमार्ग में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके गी। इस कार्य की अनुमानित लागत 5369 करोड़ है। परियोजना के 2022-23 तक पूरा होने की उम्मीद है। कहा, जल परिवहन के लिए जल्द ही गंगा में ड्रेजिंग होगी। इसके लिए तीन मीटर गहराई की जरूरत है।
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जमीन अधिग्रहण के मामले 15 दिन में सुलझाएं
रामनगर। मांडविया ने मंगलवार को यहां निर्माणाधीन मल्टी मॉडल टर्मिनल और इसके विस्तारीकरण का जायजा लिया। उन्होंने वाराणसी व चंदौली के जिलाधिकारियों को आदेश दिया कि टर्मिनल को रोड व रेल से जोड़ने वाले मार्ग के लिए आवश्यक जमीन के अधिग्रहण के मामले 15 दिन के अंदर सुलझाएं। राज्यमंत्री ने कहा कि यदि मामला नहीं सुलझा तो फिर वह अपने स्तर से कार्रवाई करेंगे।
करीब पौने दस बजे भीटी बंदरगाह पहुंचे राज्यमंत्री ने रामनगर-हल्दिया के बीच जल परिवहन योजना में आने वाली दुश्वारियों पर विचार विमर्श किया गया। इसके बाद निर्माणाधीन बंदरगाह का सर्वे किया तथा रेल और रोड को जोड़ने में आ रही समस्या से अवगत कराया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बावजूद यह मामला अभी तक सुलझाया नही जा सका है। इसके चलते योजना की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कुछ भूमिधर अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं है। इससे रेलवे लाइन और रोड का काम बाधित हो रहा है। अभी बंदरगाह का 53 प्रतिशत ही हो पाया है। राज्यमंत्री ने शेष कार्य नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य दिया है।
उनके साथ इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया, पटना के निदेशक रविकांत, डीएम वाराणसी योगेश्वर राम मिश्र, डीएम चंदौली हेमंत कुमार, एसडीएम सदर सुनील वर्मा, सीडीओ सुनील कुमार वर्मा, एसडीएम चंदौली दीप्ति देव, प्रोजेक्ट मैनेजर योगानंद, प्लानिंग मैनेजर अतुल पांचा के साथ राजमार्ग व जल परिवहन के मुद्दों पर समीक्षा की।