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कॉरिडोर में मिले मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर से प्राचीन नहीं
Updated Wed, 05 Dec 2018 02:07 AM IST
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वाराणसी। काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के लिए कराए जा रहे ध्वस्तीकरण में सामने आ रहे मंदिरों की प्राचीनता की जांच के लिए पुरातत्व विभाग की पांच सदस्यीय टीम ने मंगलवार को निरीक्षण किया। टीम की रिपोर्ट के अनुसार अब तक मिले मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर के निर्माण के बाद स्थापित किए गए हैं। इनमें दो मंदिरों के स्थापना से जुडे़ अभिलेख प्राप्त हुए हैं। टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. सुभाष चंद्र यादव के संयोजन में प्रोफेसर मारुति नंदन तिवारी, प्रो अतुल त्रिपाठी, डा. अजय श्रीवास्तव, डा. शांति स्वरूप सिन्हा की टीम मंगलवार को काशी विश्वनाथ मंदिर के ध्वस्तीकरण क्षेत्र में पहुंची। इसमें मकानों और ध्वस्तीकरण के दौरान सामने आए मंदिरों के शैली, अलंकरण सहित अन्य आधार पर जांच की गई। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि ध्वस्तीकरण क्षेत्र में मंदिरों की जांच में कोई भी मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर से प्राचीन नहीं मिला है। टीम ने माना है कि ज्यादातर मंदिर 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से 19 शताब्दी के प्रारंभ में स्थापित किए गए हैं। टीम का कहना है कि अहिल्या बाई होलकर द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर जीर्णोद्धार के दौरान ही धर्मावलंबियों ने इस क्षेत्र में मंदिरों की शृंखला स्थापित की होगी। विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही तैयार कर ली जाएगी।
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क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. सुभाष चंद्र यादव के संयोजन में प्रोफेसर मारुति नंदन तिवारी, प्रो अतुल त्रिपाठी, डा. अजय श्रीवास्तव, डा. शांति स्वरूप सिन्हा की टीम मंगलवार को काशी विश्वनाथ मंदिर के ध्वस्तीकरण क्षेत्र में पहुंची। इसमें मकानों और ध्वस्तीकरण के दौरान सामने आए मंदिरों के शैली, अलंकरण सहित अन्य आधार पर जांच की गई। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि ध्वस्तीकरण क्षेत्र में मंदिरों की जांच में कोई भी मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर से प्राचीन नहीं मिला है। टीम ने माना है कि ज्यादातर मंदिर 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से 19 शताब्दी के प्रारंभ में स्थापित किए गए हैं। टीम का कहना है कि अहिल्या बाई होलकर द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर जीर्णोद्धार के दौरान ही धर्मावलंबियों ने इस क्षेत्र में मंदिरों की शृंखला स्थापित की होगी। विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही तैयार कर ली जाएगी।
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