फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   ‘युगांतकारी कवि थे डॉ. शंभुनाथ सिंह’

‘युगांतकारी कवि थे डॉ. शंभुनाथ सिंह’

Wed, 28 Nov 2018 01:47 AM IST
Updated Wed, 28 Nov 2018 01:47 AM IST
विज्ञापन
‘युगांतकारी कवि थे डॉ. शंभुनाथ सिंह’
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में ‘भारतीयता की अभिव्यक्ति, नवगीत और शंभुनाथ सिंह’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन मंगलवार को हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध नवगीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि डॉ. शंभुनाथ सिंह हिंदी कविता को नवजीवन प्रदान करने वाले युगांतकारी कवि थे। उन्होंने नवगीत को स्थापित करने के लिए नया काव्य शास्त्र रचा। भारतीयता की अभिव्यक्ति हिंदी नवगीतों में डॉ. शंभुनाथ सिंह के नेतृत्व व निर्देशन में आई।
विज्ञापन

मुख्य वक्ता मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार व नवगीतकार ओमप्रकाश तिवारी ने कहा कि 1992 के बाद जिस तरह के राजनीतिक व सामाजिक परिवर्तन देश में हुए, उसके बाद नवगीत को डॉ. शंभुनाथ सिंह जैसे नेतृत्व की जरूरत थी। उस दौर में उनका न होना नवगीत के लिए नुकसानदेह साबित हुआ। आज नवगीत में वह सभी बातें बड़ी खूबसूरती से कही जा रही हैं जो कभी धूमिल या मुक्तिबोध नई कविता के जरिये कहना चाहते थे। अध्यक्षता करते हुए डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि डॉ. शंभुनाथ सिंह को किसी समीक्षा की जरूरत नहीं। नवगीतों के जनक माने जाते हैं। उनके साहित्य को नवगीत के संकुचित दायरे में बांधकर नहीं देखा जा सकता। उनका कैनवास बहुत व्यापक है। इससे पहले के सत्र में डॉ. माहेश्वर तिवारी, डॉ. इंदीवर ने अपने विचार रखे। संचालन फाउंडेशन के महासचिव राजीव कुमार सिंह ने किया। स्वागत डॉ. रोली सिंह व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमिता दूबे ने किया। इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र, डॉ. चंद्रकला त्रिपाठी, डॉ. एमएनपी तिवारी, डॉ. श्रद्धानंद, डॉ. श्रद्धा सिंह, डॉ. चंपा सिंह मौजूद रहीं।
विज्ञापन

पीएम मोदी ने भेजा शुभकामना संदेश
‘बरसती चली जा रही व्योम ज्वाला, तपाते चले जा रहे हम जवानी, नहीं पर मरेंगे, नहीं पर मिटेंगे, न जब जक यहां विश्व नूतन रचेंगे। यही भूख तन में यही प्यास मन में, करें विश्व सुंदर बने विश्व सुंदर। जैसी पंक्तियों के रचयिता डॉ. शंभुुनाथ सिंह में भारतीयता की अभिव्यक्ति साफ तौर पर झलकती है। वसुधैव कुटुंबकम के मंत्र पर चलते हुए विश्व कल्याण की भावना उनकी रचनाओं का विशेष अंग रही हैं’। डॉ. शंभुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान व हिंदी विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी के आयोजन पर अपना शुभकामना संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्हीं शब्दों में दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed