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दूसरे दिन भी अवैध मकान गिराए
Updated Fri, 13 Apr 2018 01:16 AM IST
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सुरियावां। क्षेत्र के बिहियापुर गांव में तालाब की जमीन पर हुए अतिक्रमण पर बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी प्रशासन का बुलडोजर चला। हालांकि इस दौरान प्रशासनिक टीम को प्रभावित लोगों का विरोध भी झेलना पड़ा। उनका कहना था कि प्रशासन ने नोटिस दिए बिना जल्दबाजी में कार्रवाई कर दिया।
भारी फोर्स के साथ पहुंचे एसडीएम, सीओ, थानाध्यक्ष आदि ने सुबह दस बजे हाई मशीन चैनल मंगाकर वहां बने दिनेश कुमार के सबसे बड़े मकान को जमींदोज कर दिया। शाम तक चली कार्रवाई के दौरान प्रभावित लोग बेहाल रहे। जिनका मकान तालाब की जमीन का अतिक्रमण करने के नाम पर प्रशासन ने धरासायी किया है, उन लोगों ने बताया कि भूमिधर लोगों का मकान भी गिरा दिया गया। कोमल जायसवाल ने कहा कि मेरा और पांच अन्य लोगों पार्वती, देवी जायसवाल, कौशल, संजय के मकान की जमीन खतौनी में दर्ज है, जो तालाब के क्षेत्र में नहीं आता है। हम सभी के मकान के पीछे के चार कमरे गिरा दिए गए। 1965 में जमीन रजिस्ट्री कराकर मकान बनवाए थे। दिनेश कुमार ने बताया कि रजिस्ट्री कराकर भवन बनवाया गया था, करोड़ों की संपत्ति को पुन: तालाब में दर्ज कर अतिक्रमण दिखाकर मकान गिरा दिया गया। मीणा, शिव गोविंद, वीरेंद्र, सरिता, दिनेश बाबूराम आदि का आरोप है कि भूमिधरी जमीन कागज में देखकर रजिस्ट्री कराई गई थी। बाद में तालाब में परिवर्तित कर अतिक्रमण के नाम पर करोड़ों की संपदा को नष्ट कर दिया गया। प्रशासन ने खुद को बचाने के चक्कर में जल्दबाजी में कार्रवाई कर दिया। हमें नोटिस भी नहीं दी गई। बृहस्पतिवार को जिनके मकान ढहाए गए, उनमें रोष देखा गया।
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भारी फोर्स के साथ पहुंचे एसडीएम, सीओ, थानाध्यक्ष आदि ने सुबह दस बजे हाई मशीन चैनल मंगाकर वहां बने दिनेश कुमार के सबसे बड़े मकान को जमींदोज कर दिया। शाम तक चली कार्रवाई के दौरान प्रभावित लोग बेहाल रहे। जिनका मकान तालाब की जमीन का अतिक्रमण करने के नाम पर प्रशासन ने धरासायी किया है, उन लोगों ने बताया कि भूमिधर लोगों का मकान भी गिरा दिया गया। कोमल जायसवाल ने कहा कि मेरा और पांच अन्य लोगों पार्वती, देवी जायसवाल, कौशल, संजय के मकान की जमीन खतौनी में दर्ज है, जो तालाब के क्षेत्र में नहीं आता है। हम सभी के मकान के पीछे के चार कमरे गिरा दिए गए। 1965 में जमीन रजिस्ट्री कराकर मकान बनवाए थे। दिनेश कुमार ने बताया कि रजिस्ट्री कराकर भवन बनवाया गया था, करोड़ों की संपत्ति को पुन: तालाब में दर्ज कर अतिक्रमण दिखाकर मकान गिरा दिया गया। मीणा, शिव गोविंद, वीरेंद्र, सरिता, दिनेश बाबूराम आदि का आरोप है कि भूमिधरी जमीन कागज में देखकर रजिस्ट्री कराई गई थी। बाद में तालाब में परिवर्तित कर अतिक्रमण के नाम पर करोड़ों की संपदा को नष्ट कर दिया गया। प्रशासन ने खुद को बचाने के चक्कर में जल्दबाजी में कार्रवाई कर दिया। हमें नोटिस भी नहीं दी गई। बृहस्पतिवार को जिनके मकान ढहाए गए, उनमें रोष देखा गया।
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