{"_id":"5a907da74f1c1ba5268bbe69","slug":"61519418791-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक परिवार की पुर्जी से चलती थी सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक परिवार की पुर्जी से चलती थी सरकार
Updated Sat, 24 Feb 2018 02:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक परिवार की पुर्जी से सरकार चलती थी। सत्तर साल की विसंगति साढ़े तीन साल में दूर नहीं होंगी। लेकिन साढ़े तीन साल में पूत के पांव पालने में दिखाई देने लगते हैं। यही लक्षण विरोधियों को दिखाई पड़ रहा है। शुक्रवार को उन्होंने बड़ा लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित तीन दिवसीय उत्तर क्षेत्रीय कृषि एवं पशु आरोग्य मेला का उद्घाटन किया। इस मौके पर सब्जी ज्ञान एम कृषि एप लांच करने के बाद किसानों को सम्मानित किया।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सत्तर सालों में 55 प्रतिशत खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। यह इटली नहीं भारत है। हर खेत को पानी नहीं मिलेगा तो हर हाथ को काम संभव नहीं होगा। सत्तर साल के लोकतंत्र को एक परिवार ने चलाया। यूपीए सरकार ने पांच साल में 121082 करोड़ बजट कृषि क्षेत्र को दिया था। मोदी सरकार ने पांच साल में 211694 करोड़ रुपये का बजट दिया है। जो 74.5 प्रतिशत अधिक है।
वाजपेयी सरकार में कृषि से जुड़े सात सुझाव आए तो उसे लागू नहीं किया गया। आजादी के बाद 1964 तक कृषि क्षेत्र में रिफार्म नहीं हुआ। 65 में जब लाल बहादुर शास्त्री आए तो मैक्सिको में संकर प्रजाति के जन्म के बाद हरित क्रांति आई। 80 के दशक में सूखा और अकाल आया तो किसान कर्जखोर हो गए। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार आई तो 4 किसान क्रेडिट कार्ड मिला। 2004 तक जो सुधार हुए उसे दस साल तक कांग्रेस सरकार ने लागू नहीं किया। फैक्ट्री में बनने वाला यूरिया किसानों के बजाय सिथेंटिक दूध के लिए दूसरी कंपनियों के पास पहुंच जाता था। सरकार ने नीम कोटेड यूरिया लाकर कंपनियों के पास जाने वाला यूरिया किसानों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि मां बीमार होगी तो किसान सुखी कैसे रहेगा। स्वायल हेल्थ मैनेजमेंट की दिशा में बड़ा काम किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सत्तर सालों में 55 प्रतिशत खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। यह इटली नहीं भारत है। हर खेत को पानी नहीं मिलेगा तो हर हाथ को काम संभव नहीं होगा। सत्तर साल के लोकतंत्र को एक परिवार ने चलाया। यूपीए सरकार ने पांच साल में 121082 करोड़ बजट कृषि क्षेत्र को दिया था। मोदी सरकार ने पांच साल में 211694 करोड़ रुपये का बजट दिया है। जो 74.5 प्रतिशत अधिक है।
विज्ञापन
वाजपेयी सरकार में कृषि से जुड़े सात सुझाव आए तो उसे लागू नहीं किया गया। आजादी के बाद 1964 तक कृषि क्षेत्र में रिफार्म नहीं हुआ। 65 में जब लाल बहादुर शास्त्री आए तो मैक्सिको में संकर प्रजाति के जन्म के बाद हरित क्रांति आई। 80 के दशक में सूखा और अकाल आया तो किसान कर्जखोर हो गए। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार आई तो 4 किसान क्रेडिट कार्ड मिला। 2004 तक जो सुधार हुए उसे दस साल तक कांग्रेस सरकार ने लागू नहीं किया। फैक्ट्री में बनने वाला यूरिया किसानों के बजाय सिथेंटिक दूध के लिए दूसरी कंपनियों के पास पहुंच जाता था। सरकार ने नीम कोटेड यूरिया लाकर कंपनियों के पास जाने वाला यूरिया किसानों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि मां बीमार होगी तो किसान सुखी कैसे रहेगा। स्वायल हेल्थ मैनेजमेंट की दिशा में बड़ा काम किया जा रहा है।
विज्ञापन