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पांच जांच, पांच महीने, नतीजा कुछ नहीं
Updated Thu, 22 Feb 2018 03:00 AM IST
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वाराणसी। पांच महीने पहले 21 सितंबर को बीएचयू परिसर में छात्रा से छेड़खानी और 23 सितंबर को धरना दे रही छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना ने अव्यवस्थाओं और उदासीनता को ही जाहिर नहीं किया था, कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी की विदाई का कारण भी यही घटनाएं बन गईं।
देश भर में सुर्खियां बनी इस घटना के पांच महीने शुक्रवार को पूरे हो जाएंगे। इन घटनाओं के हर पहलू की जांच के लिए कुल पांच अलग-अलग कमेटी बनाई गई थीं। पूरे मामले के तथ्यों की पड़ताल के लिए बीएचयू प्रशासन ने भी एक आंतरिक कमेटी बनाई थी। चूंकि अब तक किसी भी कमेटी की जांच पूरी नहीं हुई है इसलिए दोषियों पर कार्रवाई का सवाल ही पैदा नहीं होता है। उधर, चार महीने पहले 26 नवंबर, 2017 को प्रो. त्रिपाठी का कुलपति का कार्यकाल भी खत्म हो गया है। उनके स्थान पर नया कुलपति भी नियुक्त नहीं हो सका है।
विश्वविद्यालय परिसर में 21 सितंबर की शाम को बीएफए की छात्रा के साथ छेड़खानी के विरोध में 22 सितंबर की सुबह से छात्राओं ने सिंह द्वार पर धरना दिया था। 40 घंटे तक धरने के बाद जब किसी अधिकारी ने सुध नहीं ली तो छात्राएं 23 सितंबर की रात 10 बजे कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठ गई। आरोप लगाया गया था यहां पहले प्रॉक्टोरियल बोर्ड के गार्डों ने लाठीचार्ज कर दिया। इसके बाद कैंपस का माहौल गरमा गया। आरोप है कि इसी बीच महिला महाविद्यालय गेट पर खड़ी छात्राओं पर लाठीचार्ज कर दिया गया, जिसमें आधा दर्जन छात्राएं जख्मी हुई थीं।
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देश भर में सुर्खियां बनी इस घटना के पांच महीने शुक्रवार को पूरे हो जाएंगे। इन घटनाओं के हर पहलू की जांच के लिए कुल पांच अलग-अलग कमेटी बनाई गई थीं। पूरे मामले के तथ्यों की पड़ताल के लिए बीएचयू प्रशासन ने भी एक आंतरिक कमेटी बनाई थी। चूंकि अब तक किसी भी कमेटी की जांच पूरी नहीं हुई है इसलिए दोषियों पर कार्रवाई का सवाल ही पैदा नहीं होता है। उधर, चार महीने पहले 26 नवंबर, 2017 को प्रो. त्रिपाठी का कुलपति का कार्यकाल भी खत्म हो गया है। उनके स्थान पर नया कुलपति भी नियुक्त नहीं हो सका है।
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विश्वविद्यालय परिसर में 21 सितंबर की शाम को बीएफए की छात्रा के साथ छेड़खानी के विरोध में 22 सितंबर की सुबह से छात्राओं ने सिंह द्वार पर धरना दिया था। 40 घंटे तक धरने के बाद जब किसी अधिकारी ने सुध नहीं ली तो छात्राएं 23 सितंबर की रात 10 बजे कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठ गई। आरोप लगाया गया था यहां पहले प्रॉक्टोरियल बोर्ड के गार्डों ने लाठीचार्ज कर दिया। इसके बाद कैंपस का माहौल गरमा गया। आरोप है कि इसी बीच महिला महाविद्यालय गेट पर खड़ी छात्राओं पर लाठीचार्ज कर दिया गया, जिसमें आधा दर्जन छात्राएं जख्मी हुई थीं।
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