{"_id":"5a32e2954f1c1ba7668ba213","slug":"61513284245-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बनाई महायोजना, किया कुछ नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बनाई महायोजना, किया कुछ नहीं
Updated Fri, 15 Dec 2017 02:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। शहर के सुनियोजित विकास के लिए विकास प्राधिकरण ने महायोजनाएं तो बनाईं लेकिन उस पर अमल नहीं किया। शहर के लिए पहली महायोजना वर्ष 2003 में बनी, ‘महायोजना 2011’ के रूप में। तब दस वर्ष आगे की शहर की बुनियादी जरूरतों, विस्तार लेती आबादी को ध्यान में रखते हुए सुव्यवस्थित विकास का खाका इसके जरिए खींचा गया। शासन से अप्रूव्ड होने के बाद यह महायोजना लागू भी हो गई लेकिन उसके प्रावधानों, नियमों को अमल में लाने की महज खानापूर्ति ही अधिक की गई। जानकारों का दावा है कि महायोजना 2011 के निर्धारित प्रावधानों का बमुश्किल तीस से चालीस फीसदी भी अमल नहीं हुआ। अब कुछ वैसी ही हालत ‘महायोजना 2031’ भी है।
2014-15 में ही शासन की मंजूरी के बाद महायोजना 2031 प्रभावी हो चुकी है लेकिन शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए इसके तय प्रावधानों को अब तक लागू नहीं कराया जा सका है। जबकि, महायोजना में क्षेत्रवार बाकायदा भू उपयोग निर्धारित है। कहां पर्यावरण के नजरिए से ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाना है और कहां कॉलोनियां बसाई जा सकती हैं, इन सबका विवरण है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन से वीडीए तक के अधिकारियों ने अब तक इस पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई है। यदि महायोजना ही ठीक तरीके से लागू करा दी जाए तो कई समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी।
आय बढ़ती और होता सुव्यवस्थित विकास
जानकारों का दावा है कि पहली महायोजना जब बनी, तब शासन-प्रशासन और वीडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने यदि पूरी सख्ती से उसे लागू कराया होता तो आज शहर के हालात दूसरे होते। अनियोजित विकास का मकड़जाल चारों तरफ नहीं फैलने पाता। जो भी कॉलोनियां आबाद होतीं, वह नियम-प्रावधानों के तहत होतीं। ऐसा होने पर न सिर्फ वीडीए के साथ ही नगर निगम और जलकल की आय बढ़ती बल्कि उस अनुरूप बुनियादी सुविधाओं का ढांचा भी मजबूत होता। दरअसल, वीडीए सूत्रों के मुताबिक शहर में अवैध कॉलोनियों की बाढ़ वर्ष 2000 के बाद आई। उसके पहले इक्का-दुक्का कॉलोनियां विकसित हो रही थीं। हैरानी की बात यह कि महायोजना लागू होने के बावजूद अनियोजित विकास का जाल मनमाना फैलता गया और जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे तमाशा देखते रहे। महायोजना धरी रह गई। धड़ल्ले से जहां-तहां कालोनियां विकसित हो गई और निर्माण हो गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
2014-15 में ही शासन की मंजूरी के बाद महायोजना 2031 प्रभावी हो चुकी है लेकिन शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए इसके तय प्रावधानों को अब तक लागू नहीं कराया जा सका है। जबकि, महायोजना में क्षेत्रवार बाकायदा भू उपयोग निर्धारित है। कहां पर्यावरण के नजरिए से ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाना है और कहां कॉलोनियां बसाई जा सकती हैं, इन सबका विवरण है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन से वीडीए तक के अधिकारियों ने अब तक इस पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई है। यदि महायोजना ही ठीक तरीके से लागू करा दी जाए तो कई समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी।
विज्ञापन
आय बढ़ती और होता सुव्यवस्थित विकास
जानकारों का दावा है कि पहली महायोजना जब बनी, तब शासन-प्रशासन और वीडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने यदि पूरी सख्ती से उसे लागू कराया होता तो आज शहर के हालात दूसरे होते। अनियोजित विकास का मकड़जाल चारों तरफ नहीं फैलने पाता। जो भी कॉलोनियां आबाद होतीं, वह नियम-प्रावधानों के तहत होतीं। ऐसा होने पर न सिर्फ वीडीए के साथ ही नगर निगम और जलकल की आय बढ़ती बल्कि उस अनुरूप बुनियादी सुविधाओं का ढांचा भी मजबूत होता। दरअसल, वीडीए सूत्रों के मुताबिक शहर में अवैध कॉलोनियों की बाढ़ वर्ष 2000 के बाद आई। उसके पहले इक्का-दुक्का कॉलोनियां विकसित हो रही थीं। हैरानी की बात यह कि महायोजना लागू होने के बावजूद अनियोजित विकास का जाल मनमाना फैलता गया और जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे तमाशा देखते रहे। महायोजना धरी रह गई। धड़ल्ले से जहां-तहां कालोनियां विकसित हो गई और निर्माण हो गए।
विज्ञापन