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जानलेवा ‘एमएनडी’ से आगाह करेगी डाक्यूमेंट्री
Updated Mon, 11 Dec 2017 02:17 AM IST
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वाराणसी। नसों को गला देने वाली भयावह बीमारी ‘मोटर न्यूरॉन डिजीज’ (एमएनडी) पर अभी तक दवा भले नहीं बन सकी लेकिन इसके खतरे से आगाह करने के लिए डाक्यूमेंट्री बनकर तैयार है। ‘द डाइंग मैन एंड हिज डाइंग सिटी’ डाक्यूमेंट्री को बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. वीएन मिश्र के निर्देशन में तैयार किया है नरेंद्र आचार्य ने। इस डाक्यूमेंट्री में मणिकर्णिका महाश्मशान पर मोक्ष की अवधारणा भी दिखेगी और रामनगर किले के वैभव से लेकर और महामना की कर्मस्थली बीएचयू में कर्तव्य पथ पर बढ़ने की प्रेरणा भी। 26 जनवरी को इस डाक्यूमेंट्री को बीएचयू में महामना को समर्पित किया जाएगा। मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर के हाथों इस डाक्यूमेंट्री को रिलीज कराने की योजना है।
धीरे-धीरे नसों को गलाकर मौत की नींद सुनलाने वाली बीमारी मोटर न्यूरॉन डिजीज के आंकड़े भी कम चौंकाने वाले नहीं है। बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. वीएन मिश्र से इस बीमारी से पीड़ित 543 लोग इलाज करवा रहे हैं। अब तक कोई कारगर दवा न होने की वजह से उनकी जिंदगी बचेगी या नहीं, यह कह पाना तो मुश्किल है लेकिन बीमारी के प्रति लोगों को इस डाक्यूमेंट्री के जरिए सावधान किया जाएगा। 18 मिनट की इस डाक्यूमेंट्री की शूटिंग मणिकर्णिका घाट, तुलसी घाट के अलावा बीएचयू रामनगर, वरुणा, असि और गंगा के तटों पर की गई है। इसमें मणिकर्णिका के मोक्ष की अवधारणा से लोग परिचित होंगे। तिल तिल कर मरता हुआ एक आदमी भी इस डाक्यूमेंट्री में दिखेगा और मरता हुआ उसका शहर भी। इस फिल्म का नायक अपनी जिंदगी से जूझने के साथ ही अपने शहर के हाल की भी फिक्र करता दिखेगा। इस डाक्यूमेंट्री में बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने भी काम किया है।
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धीरे-धीरे नसों को गलाकर मौत की नींद सुनलाने वाली बीमारी मोटर न्यूरॉन डिजीज के आंकड़े भी कम चौंकाने वाले नहीं है। बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. वीएन मिश्र से इस बीमारी से पीड़ित 543 लोग इलाज करवा रहे हैं। अब तक कोई कारगर दवा न होने की वजह से उनकी जिंदगी बचेगी या नहीं, यह कह पाना तो मुश्किल है लेकिन बीमारी के प्रति लोगों को इस डाक्यूमेंट्री के जरिए सावधान किया जाएगा। 18 मिनट की इस डाक्यूमेंट्री की शूटिंग मणिकर्णिका घाट, तुलसी घाट के अलावा बीएचयू रामनगर, वरुणा, असि और गंगा के तटों पर की गई है। इसमें मणिकर्णिका के मोक्ष की अवधारणा से लोग परिचित होंगे। तिल तिल कर मरता हुआ एक आदमी भी इस डाक्यूमेंट्री में दिखेगा और मरता हुआ उसका शहर भी। इस फिल्म का नायक अपनी जिंदगी से जूझने के साथ ही अपने शहर के हाल की भी फिक्र करता दिखेगा। इस डाक्यूमेंट्री में बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने भी काम किया है।
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