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शिव की जटा में वैराग्य रूपी गंगा का प्रवाह: बाल व्यास
Updated Mon, 17 Jul 2017 02:18 AM IST
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वाराणसी। प्रख्यात कथा मर्मज्ञ बाल व्यास पं. श्रीकांत शर्मा ने रविवार को साधना, सद्गति और मुक्ति की सहज व्याख्या की। उन्होंने अहंकार, विकार से मुक्त होने का मार्ग सुझाया। कहा कि बुद्धि रूपी जटा को बांधकर ऐसा भजन करें कि परमात्मा की नजर पड़ जाए। भजन से दूर होना, आत्महत्या करने के समान है। दुनिया में हर असंभव काम भगवान की सेवा और सत्संग से संभव हो सकता है।
नाटी इमली के मैदान में शिव महापुराण कथा के प्रसंगों के साथ बाल व्यास ने अनुराग, स्वराग और वैराग्य के चिंतन को लोगों के चित्त में उतारने की कोशिश की। बताया कि जो अकिंचन या अव्यक्त है, फिर अदृश्य रहते हुए भी हर जगह विराजमान है वही शिव है। बाल व्यास ने भगवान श्रीराम के अनुरागी, भगवान श्रीकृष्ण के स्वरागी और भगवान शिव के वैरागी रूप का विस्तृत वर्णन किया। बताया कि शिव ने सिर पर गंगा को धारण किया है। इसलिए कि गंगा सदैव वैराग्य से जोड़ती है। उन्होंने बताया कि शिव महापुराण जीते जी मनुष्य को मुक्ति प्रदान करने वाला ग्रंथ है। इसके लिए चित्त के साथ साधना की जरूरत है। इस कथा को सुनने से मनुष्य सद्गति की ओर अग्रसर हो जाता है। बालव्यास का कहना था कि जिसका संसार में कोई सहारा नहीं होता, उसके बाबा विश्वनाथ होते हैं। उन्होंने बताया कि इस सृष्टि का निर्माण महादेव ने किया है और सृष्टि के अंत में भी सिर्फ महादेव ही रह जाएंगे। बालव्यास ने कहा कि मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाने का एकमात्र तरीका भजन ही है।
उन्होंने कहा कि सद्गुण करने वाले को अहंकार से बचना चाहिए। सद्गुणी व्यक्ति भी जब अहंकार में फंसकर मैं मैं करने लगता है तो वह मिट्टी में मिल जाता है। लेकिन तू ही तू ही कहने वाला परम ब्रह्म में समा जाता है। कथा मंडप में काशी सत्संग सेवा समिति के दीनानाथ झुनझुनवाला, अवधेश खेमका, अजय खेमका, गोपाल अग्रवाल, कैलाश नाथ पांडेय, जयकिशन केडिया, संजय छाछड़िया, सुरेश तुलस्यान, नरेश रूंगटा, बैद्यनाथ भालोटिया, आनंद स्वरूप अग्रवाल, प्रमोद बजाज, राजेश तुलस्यान, अनिल सर्राफ, किशन सिथोरिया, अनिल जाजोदिया, आनंद लाड़िया समेत तमाम लोग उपस्थित थे। संचालन पवन अग्रवाल ने किया।
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न्यास परिषद के अध्यक्ष समेत पांच विभूतियां सम्मानित
वाराणसी। बाल व्यास पं श्रीकांत शर्मा ने काशी की पांच विभूतियों को सम्मानित किया। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष पं. अशोक द्विवेदी के अलावा आयुर्वेदाचार्य पं. शशिकांत दीक्षित, चिकित्सक डॉ. सुनील शाह, आचार्य लक्ष्मीकांत उपाध्याय, डॉ. एके रस्तोगी को स्मृति चिह्न, अंगवस्त्रम प्रदान किया गया। कथा के पूर्व मारवाड़ी युवा मंच काशी एवं मारवाड़ी युवा मंच शिवा द्वारा बालव्यास का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न से सम्मान किया गया।
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नाटी इमली के मैदान में शिव महापुराण कथा के प्रसंगों के साथ बाल व्यास ने अनुराग, स्वराग और वैराग्य के चिंतन को लोगों के चित्त में उतारने की कोशिश की। बताया कि जो अकिंचन या अव्यक्त है, फिर अदृश्य रहते हुए भी हर जगह विराजमान है वही शिव है। बाल व्यास ने भगवान श्रीराम के अनुरागी, भगवान श्रीकृष्ण के स्वरागी और भगवान शिव के वैरागी रूप का विस्तृत वर्णन किया। बताया कि शिव ने सिर पर गंगा को धारण किया है। इसलिए कि गंगा सदैव वैराग्य से जोड़ती है। उन्होंने बताया कि शिव महापुराण जीते जी मनुष्य को मुक्ति प्रदान करने वाला ग्रंथ है। इसके लिए चित्त के साथ साधना की जरूरत है। इस कथा को सुनने से मनुष्य सद्गति की ओर अग्रसर हो जाता है। बालव्यास का कहना था कि जिसका संसार में कोई सहारा नहीं होता, उसके बाबा विश्वनाथ होते हैं। उन्होंने बताया कि इस सृष्टि का निर्माण महादेव ने किया है और सृष्टि के अंत में भी सिर्फ महादेव ही रह जाएंगे। बालव्यास ने कहा कि मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाने का एकमात्र तरीका भजन ही है।
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उन्होंने कहा कि सद्गुण करने वाले को अहंकार से बचना चाहिए। सद्गुणी व्यक्ति भी जब अहंकार में फंसकर मैं मैं करने लगता है तो वह मिट्टी में मिल जाता है। लेकिन तू ही तू ही कहने वाला परम ब्रह्म में समा जाता है। कथा मंडप में काशी सत्संग सेवा समिति के दीनानाथ झुनझुनवाला, अवधेश खेमका, अजय खेमका, गोपाल अग्रवाल, कैलाश नाथ पांडेय, जयकिशन केडिया, संजय छाछड़िया, सुरेश तुलस्यान, नरेश रूंगटा, बैद्यनाथ भालोटिया, आनंद स्वरूप अग्रवाल, प्रमोद बजाज, राजेश तुलस्यान, अनिल सर्राफ, किशन सिथोरिया, अनिल जाजोदिया, आनंद लाड़िया समेत तमाम लोग उपस्थित थे। संचालन पवन अग्रवाल ने किया।
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न्यास परिषद के अध्यक्ष समेत पांच विभूतियां सम्मानित
वाराणसी। बाल व्यास पं श्रीकांत शर्मा ने काशी की पांच विभूतियों को सम्मानित किया। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष पं. अशोक द्विवेदी के अलावा आयुर्वेदाचार्य पं. शशिकांत दीक्षित, चिकित्सक डॉ. सुनील शाह, आचार्य लक्ष्मीकांत उपाध्याय, डॉ. एके रस्तोगी को स्मृति चिह्न, अंगवस्त्रम प्रदान किया गया। कथा के पूर्व मारवाड़ी युवा मंच काशी एवं मारवाड़ी युवा मंच शिवा द्वारा बालव्यास का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न से सम्मान किया गया।