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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   6 December 1992 crowd of Ayodhya Ram devotees policemen story of Kar Sevaks kewal chand of Kashi

UP : जब पुलिस ने फेंक दी थी अपनी लाठियां..., काशी के इस कारसेवक ने बताया एक सच; जलवाई गई थी रामज्योति

Fri, 06 Dec 2024 09:32 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमन विश्वकर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमन विश्वकर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 06 Dec 2024 09:32 AM IST
सार

6 December 1992 : वाराणसी के तेलियाना में रहने वाले कार सेवक केवल चंद कुशवाहा ने अब तक शादी नहीं की। उम्र 55 के तकरीबन हो गई हैं। आज भी बाबरी मस्जिद विध्वंस की चर्चा करते हैं तो उनकी ऊर्जा बढ़ जाती है। वे बहुत ही जोश से कहते हैं मुझे गर्व हैं मैं इस ऐतिहासिक आंदोलन का हिस्सा बना। युवाओं का इससे सीख लेनी चाहिए।

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6 December 1992 crowd of Ayodhya Ram devotees policemen story of Kar Sevaks kewal chand of Kashi
अपने आवास पर कार सेवक केवल चंद कुशवाहा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छह दिसंबर 1992 के पहले 30 अक्टूबर और दो नवंबर 1990 को भी अयोध्या में कार सेवकों का जत्था उमड़ा था। इस दिन भी पुलिस ने हम लोगों पर लाठियां बरसाई थी, तभी भीड़ में एक आवाज गूंजी- ये भी राम के बच्चे हैं। यह सुनते ही पुलिस वालों ने अपनी लाठियां फेंक दीं। दबी आवाज वे कह रहे थे कि हम निहत्थे राम भक्तों पर वार नहीं कर सकते।

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यह कहते हुए केवल चंद कुशवाहा के चेहरे का भाव बदल जाता है। वाराणसी के तेलियाना मोहल्ले के रहने वाले केवल चंद कार सेवक बनकर अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस का हिस्सा बने थे। उम्र 55 वर्ष के ऊपर हो गई है, लेकिन अभी तक शादी नहीं की।
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हिन्दुत्व के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन त्याग दिया। तेलियाना स्थित राम जानकी मंदिर में भोर से ही अपनी सेवा देकर वे अपने दिन की शुरुआत करते हैं।
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अमर उजाला से खास बातचीत में वे बताते हैं कि 90 के दशक में 30 अक्टूबर को काशी से सैकड़ों कार सेवकों का जत्था अयोध्या पहुंचा था। बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार हमारा नेतृत्व कर रहे थे। विश्व हिन्दू परिषद के महानगर उपाध्यक्ष डॉ. केपी यादव के साथ हम लोग विवादित ढांचे के आसपास मंच लगाते थे। सभाओं में हिन्दुत्व की बातें होती थीं। जय श्रीराम के नारे गूंजते थे।

केवल बताते हैं कि लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, उमा भारतीय, अशोक सिंघल जैसे नेताओं की बातें सुनकर तन-बदन में ऊर्जा की लहर दौड़ जाया करती थी।

राम ज्योति जलाने की हुई थी अपील
केवल चंद बताते हैं कि पांच दिसंबर 1992 को काशी से कार सेवकों के साथ सैकड़ों लोगों का जत्था जब अयोध्या के लिए प्रस्थान करने लगा तो हम लोगों को खेतासराय (जौनपुर) में ही रोक दिया गया। वहां चल रही हलचल के बारे में हमें अवगत कराया गया। हम रूक गए, रात वहीं पर कटी। आसपास के लोगों ने हम लोगों को अपने घर से शाकाहारी भोजन दिया।

दोपहर होते-होते हम लोगों को यह सूचना मिली की विवादित ढांचा ढहा दिया गया। यह सुनते ही पूरा खेतासराय जय श्रीराम के नारे से गूंज उठा। हर किसी की आंखें भर आर्इं। लोग एक-दूसरे गले लगाकर बधाई देने लगे।

वाराणसी पहुंचने के बाद अगले दिन हमें हर घर में राम ज्योति जलवाने के निर्देश दिए गए थे। हम लोगों ने इसे पूरा भी किया। तेलियाना के राम जानकी मंदिर में भी दीप जलाए गए। रातभर राम भजन हुआ। इसके साथ ही राम मंदिर के लिए हर घर से एक र्इंट और एक रुपये की अपील की गई थी। कई लोगों ने इसमें भरपूर सहयोग दिया।

बनवाई गई थी भगवा रंग की अबीर
केवल चंद बताते हैं कि 1993 में मार्च महीने में होली के दिन हम लोगों ने भगवान रंग की 11 किलो अबीर बनवाई थी। इसे आॅर्डर देकर काशीपुरा के एक व्यापारी से बनवाया गया था। पहली बार हम लोगों ने भगवा रंग के अबीर से होली खेली थी। हर कोई राम मंदिर बनने की खुशी थी। लेकिन हमारे पांच कार सेवक भी मारे गए थे इसका हमें हमेशा खेद रहेगा।

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