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पद्मश्री से सम्मानित किए गए डॉ. रजनीकांत
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वाराणसी। डॉ. रजनीकांत को सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री से सम्मानित किया। इस साल पद्मश्री के लिए चयनित वाराणसी के राजेश्वर आचार्य, प्रशांति सिंह, हीरा लाल यादव को यह पुरस्कार राष्ट्रपति 16 मार्च को प्रदान करेंगे। पद्म पुरस्कारों के लिए चुने गए 112 शख्सियतों में से 56 लोगों को सोमवार को पुरस्कृत किया गया।
पद्मश्री डॉ. रजनीकांत पिछले 25 वर्ष से आमजनों, उपेक्षित लोगों के जीवन स्तर में उन्नयन के लिए काम कर रहे हैं। खास तौर पर बुनकरों और भूमिहीन महिलाओं, बच्चों के लिए उनका योगदान बहुमूल्य रहा है। बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में काम कर रहे सारनाथ के मवइयां में रहने वाले डॉ. रजनीकांत मूल रूप से मिर्जापुर जिले के चुनार थाना के जलालपुरमाफी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सबल बनाने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही बनारस और आसपास के शिल्प उत्पादों को जीआई के तहत पेटेंट कराया। वर्ष 2017 में बौद्धिक संपदा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डा. रजनीकांत ने पूर्वांचल के बुनकरी से जुड़े घरेलू उत्पादों को वैश्विक मंच दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अब तक नौ उत्पादों का जीआई पंजीयन कराया और सात उत्पाद पंजीयन की प्रक्रिया में हैं। डॉ. रजनीकांत ने कहा, यह पुरस्कार बनारस सहित पूर्वांचल के शिल्पियों, बुनकरों और भूमिहीन महिलाओं को समर्पित है। इस पुरस्कार ने समाज हित में अब और ज्यादा बेहतर करने की जिम्मेदारी बढ़ा दी है।
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पद्मश्री डॉ. रजनीकांत पिछले 25 वर्ष से आमजनों, उपेक्षित लोगों के जीवन स्तर में उन्नयन के लिए काम कर रहे हैं। खास तौर पर बुनकरों और भूमिहीन महिलाओं, बच्चों के लिए उनका योगदान बहुमूल्य रहा है। बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में काम कर रहे सारनाथ के मवइयां में रहने वाले डॉ. रजनीकांत मूल रूप से मिर्जापुर जिले के चुनार थाना के जलालपुरमाफी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सबल बनाने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही बनारस और आसपास के शिल्प उत्पादों को जीआई के तहत पेटेंट कराया। वर्ष 2017 में बौद्धिक संपदा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डा. रजनीकांत ने पूर्वांचल के बुनकरी से जुड़े घरेलू उत्पादों को वैश्विक मंच दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अब तक नौ उत्पादों का जीआई पंजीयन कराया और सात उत्पाद पंजीयन की प्रक्रिया में हैं। डॉ. रजनीकांत ने कहा, यह पुरस्कार बनारस सहित पूर्वांचल के शिल्पियों, बुनकरों और भूमिहीन महिलाओं को समर्पित है। इस पुरस्कार ने समाज हित में अब और ज्यादा बेहतर करने की जिम्मेदारी बढ़ा दी है।
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