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अंतिम संस्कार से पहले चेहरा देखने भी नहीं आईं पत्नी और साली
Updated Tue, 13 Nov 2018 02:40 AM IST
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वाराणसी। मुंशी घाट स्थित मकान में मृत पड़े मिले तरुण कांति बसु (65) के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद सोमवार को पुलिस ने एनजीओ राजकली महिला कल्याण समिति की मदद से हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार कराया। वहीं, तरुण की पत्नी सुचित्रा और उनकी बड़ी बहन सुनंदा अंतिम संस्कार से पहले चेहरा देखने भी नहीं आईं। दोनों घर में ही मौजूद रहीं। घटना को लेकर मुंशी घाट और आसपास के इलाके के चाय-पान की दुकान पर मौजूद लोगों में खासी चर्चा रही। लोगों का कहना था कि आखिरकार पढ़ालिखा परिवार अवसाद ग्रस्त कैसे हो गया।
मुंशी घाट के लोगों की शिकायत पर रविवार को पुलिस तरुण कांति बसु के घर पहुंची थी। पुलिस ने घर से तीन बंदरों और तरुण कांति का शव बाहर निकाला था। पुलिस के अनुसार तरुण कांति का शव आठ से दस दिन पुराना था। तरुण कांति की मौत कब हुई और इसकी वजह क्या थी, इसके लिए दशाश्वमेध पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
उधर, मुहल्ले के लोगों ने तरुण कांति एक प्राइवेट कंपनी में अधिकारी के तौर पर कार्यरत थे। उनकी पत्नी सुचित्रा एमए (इतिहास) और सुनंदा एम (दर्शनशास्त्र) उत्तीर्ण थीं। प्राइवेट कंपनी से तरुण के सेवानिवृत्त होने पर घर का खर्च शिक्षिका रहीं सुनंदा की पेंशन से चलता था। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि दोनों बहनें 2011 से ही अवसादग्रस्त थीं और उनका रहन-सहन बेहद अजीबोगरीब था।
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रिश्तेदार कोलकाता में, नहीं आया कोई
तरुण कांति बसु के रिश्तेदार कोलकाता में रहते हैं और किसी से इस परिवार का संबंध नहीं है। पड़ोसियों और किसी अन्य से मेलजोल न होने के कारण तरुण कांति की मौत के बाद भी उनके घर कोई नहीं पहुंचा। वहीं, पुलिस और प्रशासन के स्तर से भी कोई ऐसा प्रयास नहीं किया गया कि दोनों बहनों को अस्पताल ले जाकर किसी मनोचिकित्सक से दिखाया जाए। इसके साथ ही कोई गैर सरकारी संगठन भी दोनों बहनों की सुधि लेने के लिए आगे नहीं आया और वो अपना दरवाजा बंद कर घर में पड़ी रहीं।
हम चाह रहे थे कि कुछ दिन और पति के साथ रह लेतीं
तरुण कांति की पत्नी सुचित्रा सोमवार की सुबह 10 बजे के लगभग अचानक दशाश्वमेध पुलिस चौकी पहुंची। सुचित्रा ने चौकी प्रभारी से कहा कि हम सोच रहे थे कि कुछ और दिन पति के साथ रह लेते। वो अभी जिंदा ही थे और काली पूजा का प्रसाद हमने उन्हें खिलाया था। चौकी प्रभारी ने कहा कि चलिये कबीरचौरा में डॉक्टर को दिखा देते हैं तो सुचित्रा ने मना कर दिया। चौकी प्रभारी ने कहा कि आपके पति के शव का पोस्टमार्टम होने वाला है बीएचयू चल कर चेहरा देख लीजिए। इस पर सुचित्रा ने मना कर दिया और वापस घर जाकर दरवाजा बंद कर ली। इसके बाद सुचित्रा के घर का दरवाजा नहीं खुला।
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मुंशी घाट के लोगों की शिकायत पर रविवार को पुलिस तरुण कांति बसु के घर पहुंची थी। पुलिस ने घर से तीन बंदरों और तरुण कांति का शव बाहर निकाला था। पुलिस के अनुसार तरुण कांति का शव आठ से दस दिन पुराना था। तरुण कांति की मौत कब हुई और इसकी वजह क्या थी, इसके लिए दशाश्वमेध पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
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उधर, मुहल्ले के लोगों ने तरुण कांति एक प्राइवेट कंपनी में अधिकारी के तौर पर कार्यरत थे। उनकी पत्नी सुचित्रा एमए (इतिहास) और सुनंदा एम (दर्शनशास्त्र) उत्तीर्ण थीं। प्राइवेट कंपनी से तरुण के सेवानिवृत्त होने पर घर का खर्च शिक्षिका रहीं सुनंदा की पेंशन से चलता था। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि दोनों बहनें 2011 से ही अवसादग्रस्त थीं और उनका रहन-सहन बेहद अजीबोगरीब था।
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रिश्तेदार कोलकाता में, नहीं आया कोई
तरुण कांति बसु के रिश्तेदार कोलकाता में रहते हैं और किसी से इस परिवार का संबंध नहीं है। पड़ोसियों और किसी अन्य से मेलजोल न होने के कारण तरुण कांति की मौत के बाद भी उनके घर कोई नहीं पहुंचा। वहीं, पुलिस और प्रशासन के स्तर से भी कोई ऐसा प्रयास नहीं किया गया कि दोनों बहनों को अस्पताल ले जाकर किसी मनोचिकित्सक से दिखाया जाए। इसके साथ ही कोई गैर सरकारी संगठन भी दोनों बहनों की सुधि लेने के लिए आगे नहीं आया और वो अपना दरवाजा बंद कर घर में पड़ी रहीं।
हम चाह रहे थे कि कुछ दिन और पति के साथ रह लेतीं
तरुण कांति की पत्नी सुचित्रा सोमवार की सुबह 10 बजे के लगभग अचानक दशाश्वमेध पुलिस चौकी पहुंची। सुचित्रा ने चौकी प्रभारी से कहा कि हम सोच रहे थे कि कुछ और दिन पति के साथ रह लेते। वो अभी जिंदा ही थे और काली पूजा का प्रसाद हमने उन्हें खिलाया था। चौकी प्रभारी ने कहा कि चलिये कबीरचौरा में डॉक्टर को दिखा देते हैं तो सुचित्रा ने मना कर दिया। चौकी प्रभारी ने कहा कि आपके पति के शव का पोस्टमार्टम होने वाला है बीएचयू चल कर चेहरा देख लीजिए। इस पर सुचित्रा ने मना कर दिया और वापस घर जाकर दरवाजा बंद कर ली। इसके बाद सुचित्रा के घर का दरवाजा नहीं खुला।