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आर्थिक तंगी से जूझ रहे जिले के 850 प्रेरक
Updated Mon, 30 Jul 2018 12:44 AM IST
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ज्ञानपुर। साक्षरता मिशन के तहत गांवों में संचालित लोक शिक्षा केंद्रों पर तैनात शिक्षा प्रेरकों को पिछले 25 माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया। इससे प्रेरकों आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उनके समक्ष परिवार के भरण पोषण का संकट उत्पन्न हो गया है। शासन की मनमानी से परेशान प्रेरकों में असंतोष पनपने लगा है। शिक्षा से वंचित रह गए 15 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों को अक्षर ज्ञान कराकर साक्षर बनाने के उद्देश्य से संचालित भारत साक्षर मिशन के तहत जिले की 481 ग्राम पंचायतों में 962 शिक्षा प्रेरकों की तैनाती 2012 में की गई थी। प्रेरकों को दो हजार रुपये प्रति माह मानदेय तय किया गया है। 962 शिक्षा प्रेरकों में 112 प्रेरकों ने काम छोड़ दिया है। ऐसे में अब 850 ही बचे हैं। शुरूआती दौर में उन्हें समय से मानदेय दिया जाता था लेकिन 2013 और 14 के बाद स्थिति दयनीय हो गई। कभी 10 माह तो कभी आठ माह बाद रुक-रुक कर उनका मानदेय मिला। सबसे खराब स्थिति वर्ष 2017 से बन गई है। उनके मानदेय भुगतान की दशा यह है कि 25 माह से उन्हें मानदेय नहीं मिल पाया है। इतना ही नहीं मिशन के तहत तैनात ब्लाक व जिला समन्वयकों का भी कई-कई माह का मानदेय लंबित पड़ा हुआ है। मानदेय न मिल पाने से प्रेरकों के समक्ष आर्थिक तंगी खड़ी हो गई है। उनके लिए अपने परिजनों का भरण पोषण करना भारी पड़ रहा है। यदि किसी की तबीयत खराब हो गई तो इलाज कैसे कराएं समझ नहीं पा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर प्रेरकों की संविदा भी कई माह से लटकी हुई है। मार्च 2018 के बाद करीब पांच माह गुजर गए पर अब तक संविदा नहीं बढ़ी। साक्षरता मिशन के जिला समन्वयक नीरज उपाध्याय का कहना है कि निदेशालय को मानदेय के लिए पत्र भेजा गया है। शासन स्तर से बजट मिलने पर मानदेय का भुगतान किया जाएगा।
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