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सक्रिय हो गए दलालों के गैंग, ऑनलाइन टिकट हो जा रहे ‘हैंग’0
Updated Sun, 06 May 2018 02:08 AM IST
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वाराणसी। भले ही रेल प्रशासन कितने ही दावे कर ले छुट्टियों के मौसम में ट्रेनों में बर्थ पाना आम यात्रियों के लिए आज भी टेढ़ी खीर है। जहां आम यात्री के लिए तत्काल टिकट लकी ड्रॉ सरीखा साबित हो रहा है वहीं दलालों को आसानी से टिकट मिल जा रहा है। वह उसे डेढ़ से तीन गुना दाम में बेच रहे हैं। इतना ही नहीं, समय के साथ दलाल भी हाईटेक हो चुके हैं और नए-नए सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से तत्काल टिकट को आम यात्री की पहुंच से पहले ही ऑनलाइन बुक कर ले रहे हैं। दलालों की सक्रियता को रेलवे भी स्वीकार कर रहा है और मंडल मुख्यालयों से इसके खिलाफ सख्त अभियान भी चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
बीते मंगलवार को सिंधोरा में आरपीएफ और सीआईबी की छापेमारी में एक टिकट दलाल हत्थे चला। इसके पास डेढ़ सौ से ज्यादा टिकट मिले। जांच में पता चला कि दलाल एक ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता था जो आईआरसीटीसी की साइट पर आम यात्री की पहुंच से पहले आरक्षित टिकट और तत्काल की सीट बुक कर लेता था।
ज्यादातर दलाल ऐसे ही सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर आम लोगों की ऑनलाइन टिकट बुक करने से पहले टिकट बना लेते हैं। अक्सर इसी के चलते ऑनलाइन ‘हैंग’ की समस्या से भी दो चार होना पड़ता है। वहीं, कैंट हो या मंडुवाडीह, आरक्षण केंद्रों पर टिकट काउंटर पर आए दिन पुराने चेहरे नजर आ रहे हैं। बावजूद इसके आरपीएफ और रेल स्टॉफ इसको लेकर गंभीर नहीं है। इसका खामियाजा आम यात्री को उठाना पड़ रहा है और उसे टिकट उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
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बीते मंगलवार को सिंधोरा में आरपीएफ और सीआईबी की छापेमारी में एक टिकट दलाल हत्थे चला। इसके पास डेढ़ सौ से ज्यादा टिकट मिले। जांच में पता चला कि दलाल एक ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता था जो आईआरसीटीसी की साइट पर आम यात्री की पहुंच से पहले आरक्षित टिकट और तत्काल की सीट बुक कर लेता था।
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ज्यादातर दलाल ऐसे ही सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर आम लोगों की ऑनलाइन टिकट बुक करने से पहले टिकट बना लेते हैं। अक्सर इसी के चलते ऑनलाइन ‘हैंग’ की समस्या से भी दो चार होना पड़ता है। वहीं, कैंट हो या मंडुवाडीह, आरक्षण केंद्रों पर टिकट काउंटर पर आए दिन पुराने चेहरे नजर आ रहे हैं। बावजूद इसके आरपीएफ और रेल स्टॉफ इसको लेकर गंभीर नहीं है। इसका खामियाजा आम यात्री को उठाना पड़ रहा है और उसे टिकट उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
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