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घटिया ईंट से बनाए जा रहे शौचालय
Updated Fri, 16 Mar 2018 01:28 AM IST
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ज्ञानपुर। ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता मिशन का पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला सुरियावां ब्लॉक क्षेत्र के जगतीपुर गांव का है। यहां निर्माण से लेकर मनरेगा मजदूरी तक में धांधली सामने आई। अफसरों की जांच रिपोर्ट पर डीएम ने प्रधान और सेक्रेटरी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर में शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। शासन से लेकर प्रशासन तक शौचालय निर्माण को पारदर्शी बनाने का प्रयास कर रहा है लेकिन भ्रष्टाचार करने से बाज प्रधान और सेक्रेटरी नहीं आ रहे हैं। पिछले दिनों जगतीपुर गांव निवासी फूलचंद्र मिश्र ने डीएम कार्यालय में प्रार्थना पत्र देकर शौचालय निर्माण में धांधली का आरोप लगाया था। डीएम विशाख जी ने जांच के लिए डीपीआरओ अनिल कुमार त्रिपाठी और बीडीओ सुरियावां ऊषा पाल को नामित किया। अधिकारियों ने शौचालय निर्माण की जांच की तो गड़बड़ी सामने आई। जांच के दौरान पाया गया कि शौचालय में दोयम और तेयम दर्जे के ईंट का प्रयोग किया गया। सड़क के किनारे शौचालय निर्माण किया गया जो कुछ समय बाद टूट जाएंगे और मजदूरों से मनरेगा का काम कराकर लाभार्थी को पैसा दिया गया। इसी तरह शौचालय निर्माण में अन्य सामग्री भी खराब पाई गई। जांच रिपोर्ट मिलने पर डीएम ने गांव के ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा। चेतावनी दिया कि तय समय में स्पष्टीकरण न देने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर में शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। शासन से लेकर प्रशासन तक शौचालय निर्माण को पारदर्शी बनाने का प्रयास कर रहा है लेकिन भ्रष्टाचार करने से बाज प्रधान और सेक्रेटरी नहीं आ रहे हैं। पिछले दिनों जगतीपुर गांव निवासी फूलचंद्र मिश्र ने डीएम कार्यालय में प्रार्थना पत्र देकर शौचालय निर्माण में धांधली का आरोप लगाया था। डीएम विशाख जी ने जांच के लिए डीपीआरओ अनिल कुमार त्रिपाठी और बीडीओ सुरियावां ऊषा पाल को नामित किया। अधिकारियों ने शौचालय निर्माण की जांच की तो गड़बड़ी सामने आई। जांच के दौरान पाया गया कि शौचालय में दोयम और तेयम दर्जे के ईंट का प्रयोग किया गया। सड़क के किनारे शौचालय निर्माण किया गया जो कुछ समय बाद टूट जाएंगे और मजदूरों से मनरेगा का काम कराकर लाभार्थी को पैसा दिया गया। इसी तरह शौचालय निर्माण में अन्य सामग्री भी खराब पाई गई। जांच रिपोर्ट मिलने पर डीएम ने गांव के ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा। चेतावनी दिया कि तय समय में स्पष्टीकरण न देने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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