{"_id":"5aa58a544f1c1b3a058b4afb","slug":"51520798292-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नर सेवा ही नारायण सेवा : माता सविंदर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नर सेवा ही नारायण सेवा : माता सविंदर
Updated Mon, 12 Mar 2018 01:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चौरी। कंधिया में दो दिवसीय संत समागम में रविवार को माता सविंदर हरदेव महाराज ने भक्तों को मानव सेवा का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि आपस में मानव प्रेम करे और एक-दूसरे की सेवा करे तो दुनिया बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी को प्रभु ज्ञान की रोशनी में लाएं और प्यार फैलाएं।
उन्होंने प्रेम, नम्रता, विशालता, सहनशीलता को अपनाने की सीख देते हुए कहा कि गुरुमत के गुणों को धारण कर हम अपने जीवन को खूबसूरत और आनंदमय बना सकते हैं। दूसरों को समझाने से पहले अपने स्वभाव को जरूर जांचे। प्रभु ज्ञान की रोशनी अपने अंदर लाएं और दुनिया के कोने-कोने को प्रकाशित करें। उन्होंने कहा कि इंसान को अपने विचार सकारात्मक रखना चाहिए। इससे उसे आत्मशांति मिलेगी। किसी भी क्षेत्र में लगातार कार्य करने से इंसान उस क्षेत्र में निपुणता हासिल कर लेता है लेकिन यह भी देखना जरूरी होता है कि वह किस दिशा में कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। अर्थात निरंकार प्रभु की सच्ची भक्ति मानवता की सेवा ही है। कोई क्या कर रहा है, क्या नहीं कर रहा, हम उसकी तरफ ध्यान न दें। हम गुरुमत की मर्यादा के अनुसार जीवन जी रहे हैं या नहीं, केवल इस पर ध्यान देने की जरूरत है। मानव जीवन का उद्देश्य ईश्वर का बोध करना है। ईश्वर का बोध होने से जात-पांत और मजहब के अंतर समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने सेवादल के महासचिव बीडी नागपाल और जोनल इंचार्ज रमाशंकर शुक्ला को शांतिपूर्ण और सफल आयोजन कराने के लिये सम्मानित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने प्रेम, नम्रता, विशालता, सहनशीलता को अपनाने की सीख देते हुए कहा कि गुरुमत के गुणों को धारण कर हम अपने जीवन को खूबसूरत और आनंदमय बना सकते हैं। दूसरों को समझाने से पहले अपने स्वभाव को जरूर जांचे। प्रभु ज्ञान की रोशनी अपने अंदर लाएं और दुनिया के कोने-कोने को प्रकाशित करें। उन्होंने कहा कि इंसान को अपने विचार सकारात्मक रखना चाहिए। इससे उसे आत्मशांति मिलेगी। किसी भी क्षेत्र में लगातार कार्य करने से इंसान उस क्षेत्र में निपुणता हासिल कर लेता है लेकिन यह भी देखना जरूरी होता है कि वह किस दिशा में कार्य कर रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। अर्थात निरंकार प्रभु की सच्ची भक्ति मानवता की सेवा ही है। कोई क्या कर रहा है, क्या नहीं कर रहा, हम उसकी तरफ ध्यान न दें। हम गुरुमत की मर्यादा के अनुसार जीवन जी रहे हैं या नहीं, केवल इस पर ध्यान देने की जरूरत है। मानव जीवन का उद्देश्य ईश्वर का बोध करना है। ईश्वर का बोध होने से जात-पांत और मजहब के अंतर समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने सेवादल के महासचिव बीडी नागपाल और जोनल इंचार्ज रमाशंकर शुक्ला को शांतिपूर्ण और सफल आयोजन कराने के लिये सम्मानित किया।
विज्ञापन