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महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ धरना
Updated Wed, 24 Jan 2018 01:17 AM IST
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भदोही। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माले कार्यकर्ताओ ने मंगलवार को बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं को लेकर तहसील परिसर में धरना देकर प्रदर्शन किया। जिला सचिव रामजीत यादव ने कहा कि भाजपाराज में लोकतंत्र के सुरक्षित नहीं रह गया है। पत्रकार सुरक्षित नहीं है। जजों की अलग शिकायत है। किसानों, मजदूरों की आवाज को दबाया जा रहा है। उनकी हत्याएं हो रही हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
उन्होने कहा कि जिस लोकतंत्र में किसान, पत्रकार, न्याय पालिका का दमन की शिकायत करे उसमे कौन सुरक्षित रह पाएगा। गरीबों की आवाज को दबाया जा रहा है। अपने भ्रष्टाचार करें तो ठीक दूसरे करें तो सरकार कार्रवाई के नाम पर दमन कर रही है। कहा भगत सिंह, बाबा साहब भीम राव आंबेडकर की भूमि खुद न्याय मांग रही है लेकिन जिसे केंद्र सरकार अनदेखा कर रही है।
जनता ने देश में इमरजेंसी थोपने वाली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को सत्ता से बाहर किया। अब भाजपा सरकार ने भी इमरजेंसी जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। पैदावार घटती जा रही है। कल कारखाने बंद होते जा रहे हैं यह किसी इमरजेंसी से कम नहीं है। भाजपा राज में अधिकारी और कर्मचारी निरंकुश हो गए हैं। योजनाओं में खुली धन उगाही हो रही है। भूमिहीनो का अधिकार छीना जा रहा है। एसडीएम को ज्ञापन सौंपने के बाद धरना सामाप्त किया गया। संचालन धर्मराज गौतम ने किया। बनारसी सोनकर, डा.उमशंकर यादव, लालमनी सरोज, मुलचंद्र, अवधराज, रामप्रसाद, चिंतामणि, वंशराज, कैलाश, बैजनाथ, रामकृपाल शुक्ला, भारत यादव,सुरजनाथ, राजनाथ, माया देवी, तिलकधारी आदि शामिल रहे।
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उन्होने कहा कि जिस लोकतंत्र में किसान, पत्रकार, न्याय पालिका का दमन की शिकायत करे उसमे कौन सुरक्षित रह पाएगा। गरीबों की आवाज को दबाया जा रहा है। अपने भ्रष्टाचार करें तो ठीक दूसरे करें तो सरकार कार्रवाई के नाम पर दमन कर रही है। कहा भगत सिंह, बाबा साहब भीम राव आंबेडकर की भूमि खुद न्याय मांग रही है लेकिन जिसे केंद्र सरकार अनदेखा कर रही है।
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जनता ने देश में इमरजेंसी थोपने वाली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को सत्ता से बाहर किया। अब भाजपा सरकार ने भी इमरजेंसी जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। पैदावार घटती जा रही है। कल कारखाने बंद होते जा रहे हैं यह किसी इमरजेंसी से कम नहीं है। भाजपा राज में अधिकारी और कर्मचारी निरंकुश हो गए हैं। योजनाओं में खुली धन उगाही हो रही है। भूमिहीनो का अधिकार छीना जा रहा है। एसडीएम को ज्ञापन सौंपने के बाद धरना सामाप्त किया गया। संचालन धर्मराज गौतम ने किया। बनारसी सोनकर, डा.उमशंकर यादव, लालमनी सरोज, मुलचंद्र, अवधराज, रामप्रसाद, चिंतामणि, वंशराज, कैलाश, बैजनाथ, रामकृपाल शुक्ला, भारत यादव,सुरजनाथ, राजनाथ, माया देवी, तिलकधारी आदि शामिल रहे।
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