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काशी में बंगीय खान-पान एवं संस्कृति की झलक
Updated Sat, 30 Dec 2017 02:13 AM IST
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वाराणसी। राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने, उभरते नए युवा कलाकारों को मंच प्रदान करने और बनारस एवं बंगाल की संस्कृति से रूबरू होने के लिए बंग दर्शन संस्था की ओर से सोनारपुरा में शुक्रवार को तीन दिवसीय मेले का आगाज हुआ। संस्था की ओर से आयोजित आनंद मेला में बंगीय खान-पान एवं संस्कृति की झलक देखने को मिली। बंगाली मिठाईयाें से लेकर साड़ी, कपड़े, गीत-संगीत की प्रतियोगिताएं मेले में आकर्षण का केंद्र रही।
बंग दर्शन के इस मेला का उद्घाटन काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग और बीएचयू के डॉ. रितिक सान्याल ने किया। मेले में बंगाली मिठाईयां जैसे संदेश, अमावट रोल, खजूर का गुड़, सरसों की चटनी की लोगाें ने खूब खरीदारी की। वहीं बंगाली धूपबत्ती, गुण बतासा भी लोगों ने खूब खरीदा। इसके अलावा हाथ से बनी बंगाली साडि़यां, सूट, नए साल पर ग्रीटिंग कार्ड, आर्टिफिसियल ज्वेलरी की दूकानें सजी थी। मेले में बंगाली समाज के अलावा दूसरे समाज की महिलाओं ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और सामान खरीदे। इससे पहले नए उभरते बाल और युवा कलाकारों ने बनारसी संगीत, बंगाली भजन, गीत की प्रस्तुति की। संस्था के एके भट्टाचार्य ने बताया कि यह मेला तीन दिन तक चलेगा। इस दौरान कई प्रतियोगिताएं चलेंगी। संचालन पार्श्व गायिका प्रियंका भट्टाचार्य ने किया।
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बंग दर्शन के इस मेला का उद्घाटन काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग और बीएचयू के डॉ. रितिक सान्याल ने किया। मेले में बंगाली मिठाईयां जैसे संदेश, अमावट रोल, खजूर का गुड़, सरसों की चटनी की लोगाें ने खूब खरीदारी की। वहीं बंगाली धूपबत्ती, गुण बतासा भी लोगों ने खूब खरीदा। इसके अलावा हाथ से बनी बंगाली साडि़यां, सूट, नए साल पर ग्रीटिंग कार्ड, आर्टिफिसियल ज्वेलरी की दूकानें सजी थी। मेले में बंगाली समाज के अलावा दूसरे समाज की महिलाओं ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और सामान खरीदे। इससे पहले नए उभरते बाल और युवा कलाकारों ने बनारसी संगीत, बंगाली भजन, गीत की प्रस्तुति की। संस्था के एके भट्टाचार्य ने बताया कि यह मेला तीन दिन तक चलेगा। इस दौरान कई प्रतियोगिताएं चलेंगी। संचालन पार्श्व गायिका प्रियंका भट्टाचार्य ने किया।
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