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‘राजघाट वाला पुल बड़ा आला पिया...’
Updated Wed, 12 Jul 2017 02:07 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू परिसर स्थित भोजपुरी अध्ययन केंद्र में मंगलवार को गीत-संगीत के बीच ‘वर्षा मंगल’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी और मंच कला संकाय की प्रवक्ता डॉ. संगीता पंडित के साथ ही छात्र-छात्राओं ने सावन में कजरी की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति कर माहौल में लोकजीवन की सोंधी सुगंध भर दी।
केंद्र के सह समन्वयक प्रो. अवधेश प्रधान की देखरेख में हुए आयोजन में कजरी ‘राजघाट वाला पुल बड़ा आला पिया...’ की प्रस्तुति पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। भोजपुरी अध्ययन केंद्र के शोध छात्र मनोहर, सौम्या, बॉबी एवं अमित ने मिलकर कजरी दंगल के रूप में मिर्जापुरी और बनारसी कजरी की प्रस्तुति की। इसमें रिमझिम बरसे कारी बदरिया, पिया मेंहदी मगां दा मोती झील से, मिर्जापुर कइला गुलजार हो कचौड़ी गली सून कईलऽ बलमू और बीरन भइया अईले अवनइया... जैसी कजरी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. अवधेश प्रधान ने कजरी की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। इस दौरान समन्वयक प्रो. सदानंद शाही, प्रो. मृदुला सिन्हा, प्रो. वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी, प्रो. आनंद प्रसाद मिश्र, डॉ. सरफ राज आलम, डॉ. जाह्नवी सिंह, डॉ. श्रीहरि प्रताप शाही आदि मौजूद रहे।
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केंद्र के सह समन्वयक प्रो. अवधेश प्रधान की देखरेख में हुए आयोजन में कजरी ‘राजघाट वाला पुल बड़ा आला पिया...’ की प्रस्तुति पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। भोजपुरी अध्ययन केंद्र के शोध छात्र मनोहर, सौम्या, बॉबी एवं अमित ने मिलकर कजरी दंगल के रूप में मिर्जापुरी और बनारसी कजरी की प्रस्तुति की। इसमें रिमझिम बरसे कारी बदरिया, पिया मेंहदी मगां दा मोती झील से, मिर्जापुर कइला गुलजार हो कचौड़ी गली सून कईलऽ बलमू और बीरन भइया अईले अवनइया... जैसी कजरी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. अवधेश प्रधान ने कजरी की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। इस दौरान समन्वयक प्रो. सदानंद शाही, प्रो. मृदुला सिन्हा, प्रो. वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी, प्रो. आनंद प्रसाद मिश्र, डॉ. सरफ राज आलम, डॉ. जाह्नवी सिंह, डॉ. श्रीहरि प्रताप शाही आदि मौजूद रहे।
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