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विद्वत परिषद ने अखाड़ा परिषद को दी चेतावनी
Updated Sun, 25 Jun 2017 01:59 AM IST
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वाराणसी। काशी विद्वत परिषद ने पहली कक्षा से संस्कृत भाषा को पाठ्यक्रम में अनिवार्य बनाने के लिए शनिवार को प्रस्ताव रखा। गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने, संस्कृति, संस्कारों पर आधारित मूल्यों को कक्षा में पढ़ाए जाने पर जोर दिया गया। शंकुलधारा स्थित गर्गाश्रम परिसर में हुई काशी विद्वत परिषद की बैठक में इन एजेंडों पर विस्तार से चर्चा हुई। विद्वानों ने अखाड़ा परिषद को चेताया कि वह परिषद के कार्य को लेकर अनर्गल आक्षेप लगाने से बाज आए। परिषद मठाम्नाय अनुशासन के तहत आचरण करने वाले शंकराचार्य और महामंडलेश्वरों का समर्थन करती है।
परिषद के महामंत्री प्रो. शिवजी उपाध्याय ने कहा कि संस्कृत भाषा को पहली कक्षा से ही अनिवार्य किया जाना चाहिए। अध्यक्ष प्रो. राम यत्न शुक्ल ने बताया कि जल्द ही पीएम नरेंद्र मोदी से मिलकर परिषद में लाए गए प्रस्तावों को दिया जाएगा। इस मौके पर प्रो. नरेंद्र नाथ पांडेय, डॉ. गणेश दत्त शास्त्री, डॉ. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. कमलाकांत त्रिपाठी, प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी समेत कई विद्वान उपस्थित थे। विद्वानों ने अखाड़ा परिषद के उन बयानों पर चिंता जताई, जिसमें परिषद पर फर्जी शंकराचार्यों का समर्थन करने की बात कही गई थी। विद्वत परिषद के पदाधिकारियों का कहना था कि अखाड़ा परिषद को ऐसे बयानों से बचना चाहिए।
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परिषद के महामंत्री प्रो. शिवजी उपाध्याय ने कहा कि संस्कृत भाषा को पहली कक्षा से ही अनिवार्य किया जाना चाहिए। अध्यक्ष प्रो. राम यत्न शुक्ल ने बताया कि जल्द ही पीएम नरेंद्र मोदी से मिलकर परिषद में लाए गए प्रस्तावों को दिया जाएगा। इस मौके पर प्रो. नरेंद्र नाथ पांडेय, डॉ. गणेश दत्त शास्त्री, डॉ. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. कमलाकांत त्रिपाठी, प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी समेत कई विद्वान उपस्थित थे। विद्वानों ने अखाड़ा परिषद के उन बयानों पर चिंता जताई, जिसमें परिषद पर फर्जी शंकराचार्यों का समर्थन करने की बात कही गई थी। विद्वत परिषद के पदाधिकारियों का कहना था कि अखाड़ा परिषद को ऐसे बयानों से बचना चाहिए।
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