BHU: डिजिटल कंटेंट पर शॉर्ट टर्म कोर्स करने पहुंचे 12 राज्यों के 48 प्रतिभागी, विकसित भारत को देंगे आयाम
BHU: नई शिक्षा नीति, डिजिटल कंटेंट और विकसित भारत को लेकर नई और खास जानकारियां दी जाएंगी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आईयूसीटीई में शॉर्ट टर्म कोर्स की शुरुआत हुई है।
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बीएचयू के अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में डेवलपिंग मूक्स एंड एंगेजिंग डिजिटल कंटेंट विषय पर शॉर्ट टर्म कोर्स की शुरुआत हुई। छह दिन तक चलने वाले कोर्स को पूरा करने 12 राज्यों के 48 प्रतिभागी पहुंचे।
आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, उतर प्रदेश, उत्तराखंड से आए शिक्षकों को नई शिक्षा नीति, डिजिटल कंटेंट और विकसित भारत@2047 को साथ जोड़कर बताया गया।
बताया गया कि मैसिव ओपन एंड ऑनलाइन कोर्सेस विकास में व्यावहारिक प्रशिक्षण, डिजिटल सामग्री निर्माण करने और ऑनलाइन शिक्षण के वातावरण तैयार करने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
मुख्य अतिथि विज्ञान भारती, दिल्ली के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिव कुमार शर्मा और मध्य प्रदेश सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक, भोपाल से प्रो. अनिल कोठारी भी पहुंचे। आईयूसीटीई के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने अध्यक्षता की।
डॉ. शिव कुमार शर्मा ने कहा कि आचार्य के महत्व की तीन वजहें हैं। बालक के सर्वांगीण विकास का ध्यान रखने, विद्यार्थियों के शिक्षित होने पर प्रसन्नता का अनुभव करने, समाज और सृष्टि के लिए समग्रता का भाव रखना है। एनईपी 2020 में निहित अनुभवों और ‘स्वयम’ जैसे प्लेटफॉर्म की बात की।
प्रो. अनिल कोठारी ने कहा कि स्वयम शिक्षकों को अपग्रेड और अप स्किल करने का मौका देते हैं। इससे न केवल शिक्षकों की क्षमताएं बढ़ती हैं, बल्कि छात्रों को भी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
एआर, वीआर और एआई का उपयोग प्रभावी
एआर, वीआर और एआई का उपयोग शिक्षकों को 360 डिग्री तौर पर प्रभावी बनाता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म अब एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। इससे हम विकसित भारत@2047 के लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं।
निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने कहा कि ऑनलाइन और ऑफलाइन साधनों के मिश्रण की आवश्यकता है, जिससे अच्छी शिक्षा को सभी तक पहुंचाया जा सके। यह कार्यक्रम शिक्षकों में कौशलों को बढ़ाने का काम करेगा। प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि यह डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का समय है। प्रौद्योगिकी अब विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है।