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भटका मानसून, किसानों की चिंता बढ़ी
Updated Thu, 05 Jul 2018 12:36 AM IST
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ज्ञानपुर। पखवारेभर में महज दो दिन की रिमझिम बारिश के बाद मानसून रास्ता भटक गया। भदोही जिले में इस सीजन में अब तक बारिश न के बराबर हुई है। सूर्यदेव फिर आग उगलने लगे, जिससे जिससे लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया। बुधवार को तेज झूप से बचने के लिए महिलाएं और युवतियां सिर से पांव तक कपड़े में लिपटकर निकलीं। वहीं, मौसम की बेरुखी से धान की खेती की तैयारी में जुटे किसान चिंतित हो रहे हैं। माना जा रहा है कि ऐसा ही हाल रहा तो धान की खेती प्रभावित हो जाएगी।
मानसून कालीन नगरी का रास्ता मानो भूल गया हो। हफ्तेभर से बादल किसानों का जी ललचाकर चले जा रहे हैं। इस बीच एक-दो बार हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन तवा की मानिंद तपती जमीन पर वह न के बराबर साबित हुई। लिहाजा बारिश का इंतजार कर रहे किसानों की पेशानी पर बल पड़ने लगा है। मौसम का शुरुआती रुख देखकर तमाम किसानों ने धान की रोपाई तो शुरू कर दी, लेकिन हफ्तेभर से उमड़-घुमड़ के बाद आसमान साफ हो जाने से उनकी चिंता बढ़ गई है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जून में तनिक भी बारिश नहीं हुई। जबकि जुलाई में पहली तारीख को रिमझिम बारिश हुई थी, जिसका आंकड़ा प्रशासन के पास नहीं है। कांवल के किसान जयप्रकाश मिश्र कहते हैं कि यह स्थिति निराशाजनक है। अगर अब भी बारिश न हुई तो धान की खेती पिछड़ सकती है। जोरई के राजपति यादव ने कहा कि धान की खेती बिना पर्याप्त बारिश के नहीं हो सकती। मौसम का मौजूदा रुख देखकर अच्छे संकेत नहीं मिल रहे। अगर ऐसा हुआ तो धान की पैदावार पर भी असर पड़ेगा। बुधवार को जिले में पूरे दिन सूर्यदेव आग की मानिंद तपते रहे और सामान्य जनजीवन बेहाल रहा। इससे तापमान में भी बढ़ोतरी हो गई और बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 35 डिग्री पहुंच गया। इससे गर्मी और उमस ने फिर से बेहाल करना शुरू कर दिया है।
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मानसून कालीन नगरी का रास्ता मानो भूल गया हो। हफ्तेभर से बादल किसानों का जी ललचाकर चले जा रहे हैं। इस बीच एक-दो बार हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन तवा की मानिंद तपती जमीन पर वह न के बराबर साबित हुई। लिहाजा बारिश का इंतजार कर रहे किसानों की पेशानी पर बल पड़ने लगा है। मौसम का शुरुआती रुख देखकर तमाम किसानों ने धान की रोपाई तो शुरू कर दी, लेकिन हफ्तेभर से उमड़-घुमड़ के बाद आसमान साफ हो जाने से उनकी चिंता बढ़ गई है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जून में तनिक भी बारिश नहीं हुई। जबकि जुलाई में पहली तारीख को रिमझिम बारिश हुई थी, जिसका आंकड़ा प्रशासन के पास नहीं है। कांवल के किसान जयप्रकाश मिश्र कहते हैं कि यह स्थिति निराशाजनक है। अगर अब भी बारिश न हुई तो धान की खेती पिछड़ सकती है। जोरई के राजपति यादव ने कहा कि धान की खेती बिना पर्याप्त बारिश के नहीं हो सकती। मौसम का मौजूदा रुख देखकर अच्छे संकेत नहीं मिल रहे। अगर ऐसा हुआ तो धान की पैदावार पर भी असर पड़ेगा। बुधवार को जिले में पूरे दिन सूर्यदेव आग की मानिंद तपते रहे और सामान्य जनजीवन बेहाल रहा। इससे तापमान में भी बढ़ोतरी हो गई और बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 35 डिग्री पहुंच गया। इससे गर्मी और उमस ने फिर से बेहाल करना शुरू कर दिया है।
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