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अधर में 300 करोड़ की परियोजनाएं
Updated Mon, 26 Feb 2018 01:12 AM IST
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ज्ञानपुर। सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद भी विकास की उम्मीदें परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। जिले में करीब तीन सौ करोड़ की परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। कार्यदायी संस्थाओं और ठेकेदारों की मनमानी के कारण एक से दो साल पहले ही पूर्ण हो जाने वाली परियोजनाएं आधी-अधूरी स्थिति में ठप पड़ी हुई हैं। डीएम की हिदायत के बाद भी कार्यदायी संस्थाओं की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया। इनमें कई विकास कार्य ऐसे हैं, जो पूर्ववर्ती सरकार के समय शुरू कराए गए थे। बार-बार अवधि बढ़ने से इनकी लागत भी बढ़ती जा रही है।
प्रशासनिक लापरवाही और कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी के कारण वर्षों से चल रहीं कई परियोजनाएं अभी तक साकार नहीं हो सकी हैं। जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली से जुड़ी करीब 300 करोड़ की परियोजनाएं निर्धारित अवधि के बाद भी पूरी नहीं हो सकी हैं। बसपा के शासनकाल में वर्ष 2009 में जिला मुख्यालय पर 100 शैय्या का अस्पताल बनना शुरू हुआ था। करीब नौ साल गुजरने को हैं लेकिन अब अस्पताल बनकर तैयार नहीं हो पाया। ऐसे में करीब 13 करोड़ रुपये से बनने वाले अस्पताल की लागत 18 करोड़ तक पहुंच गई है। इसमें भ्रष्टाचार के चलते कार्यदायी संस्थाओं के कई अधिकारियों पर गाज भी गिर चुकी है। इसी तरह 36 करोड़ से बन रहे दीवानी न्यायालय की निर्धारित अवधि एक साल पहले ही बीत चुकी है लेकिन अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। इस परियोजना के लटकने से भी लागत बढ़ने का अंदेशा जताया जा रहा है।
वहीं, 170 करोड़ की लागत से बन रहा कालीन एक्सपो मार्ट भी अब तक हैंडओवर नहीं किया जा सका। इसी तरह दो करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से अभोली में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पौने चार करोड़ की लागत से मैटर्निटी विंग, 17 करोड़ रुपये से आश्रम पद्धति स्कूल, 150 करोड़ की लागत से 132 केवीए के ट्रांसमिशन का काम लटका हुआ है। बैठकों में जिलाधिकारी की ओर से कार्यदायी संस्थाओं को समय पर काम पूरा कराने के लिए कई बार हिदायत दी जा चुकी है लेकिन उनकी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया।
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प्रशासनिक लापरवाही और कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी के कारण वर्षों से चल रहीं कई परियोजनाएं अभी तक साकार नहीं हो सकी हैं। जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली से जुड़ी करीब 300 करोड़ की परियोजनाएं निर्धारित अवधि के बाद भी पूरी नहीं हो सकी हैं। बसपा के शासनकाल में वर्ष 2009 में जिला मुख्यालय पर 100 शैय्या का अस्पताल बनना शुरू हुआ था। करीब नौ साल गुजरने को हैं लेकिन अब अस्पताल बनकर तैयार नहीं हो पाया। ऐसे में करीब 13 करोड़ रुपये से बनने वाले अस्पताल की लागत 18 करोड़ तक पहुंच गई है। इसमें भ्रष्टाचार के चलते कार्यदायी संस्थाओं के कई अधिकारियों पर गाज भी गिर चुकी है। इसी तरह 36 करोड़ से बन रहे दीवानी न्यायालय की निर्धारित अवधि एक साल पहले ही बीत चुकी है लेकिन अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। इस परियोजना के लटकने से भी लागत बढ़ने का अंदेशा जताया जा रहा है।
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वहीं, 170 करोड़ की लागत से बन रहा कालीन एक्सपो मार्ट भी अब तक हैंडओवर नहीं किया जा सका। इसी तरह दो करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से अभोली में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पौने चार करोड़ की लागत से मैटर्निटी विंग, 17 करोड़ रुपये से आश्रम पद्धति स्कूल, 150 करोड़ की लागत से 132 केवीए के ट्रांसमिशन का काम लटका हुआ है। बैठकों में जिलाधिकारी की ओर से कार्यदायी संस्थाओं को समय पर काम पूरा कराने के लिए कई बार हिदायत दी जा चुकी है लेकिन उनकी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया।
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