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दो मोर्चों पर चुनौतियां एक साथ
Updated Mon, 11 Dec 2017 02:17 AM IST
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वाराणसी। शासन के कड़े रुख के बाद अब वरुणा कॉरिडोर को लेकर दो मोर्चों पर चुनौतियां एक साथ खड़ी हो गई हैं। कॉरिडोर के जरिए वरुणा के संरक्षण और विकास का जो खाका खिंचा गया है, उसके लिए सबसे जरूरी है कि नदी के डूब क्षेत्र को खाली कराकर उसके बहाव के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखना। इसके बाद कॉरिडोर के बाकी कार्यों को 31 मार्च 2018 की निर्धारित समयावधि तक पूरा कराना। डूब क्षेत्र में चिह्नित अवैध निर्माणों को नोटिस जारी होने के साल भर बाद भी कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है। वहीं, कॉरिडोर का लगभग 44 प्रतिशत काम अभी बाकी है।
नदी संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि अवैध निर्माण हटाकर डूब क्षेत्र को खाली कराना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके बगैर वरुणा कॉरिडोर बनाने का नदी संरक्षण के नजरिए से कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। नदी तट को खूबसूरत बनाने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है नदी को बनाए और बचाए रखना। डूब क्षेत्र को खाली कराने के साथ ही नदी के चैनलाइजेशन के कार्य की गति भी बेहद धीमी है। कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के मुताबिक यूपीपीसीएल की ओर से अब तक बमुश्किल 56 प्रतिशत काम कराया गया है। बाकी 44 फीसदी काम को मार्च 2018 तक पूरा कराना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं। यदि समय पर काम न हुआ तो योजना की लागत भी बढ़नी तय है। फिलहाल 201 करोड़ रुपये लागत निर्धारित है। इनमें से 125 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। जबकि, धनराशि की डिमांड शासन से की गई है। शासन से धन प्राप्त होते ही तेजी से कार्य शुरू कराया जाएगा।
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नदी संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि अवैध निर्माण हटाकर डूब क्षेत्र को खाली कराना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके बगैर वरुणा कॉरिडोर बनाने का नदी संरक्षण के नजरिए से कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। नदी तट को खूबसूरत बनाने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है नदी को बनाए और बचाए रखना। डूब क्षेत्र को खाली कराने के साथ ही नदी के चैनलाइजेशन के कार्य की गति भी बेहद धीमी है। कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के मुताबिक यूपीपीसीएल की ओर से अब तक बमुश्किल 56 प्रतिशत काम कराया गया है। बाकी 44 फीसदी काम को मार्च 2018 तक पूरा कराना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं। यदि समय पर काम न हुआ तो योजना की लागत भी बढ़नी तय है। फिलहाल 201 करोड़ रुपये लागत निर्धारित है। इनमें से 125 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। जबकि, धनराशि की डिमांड शासन से की गई है। शासन से धन प्राप्त होते ही तेजी से कार्य शुरू कराया जाएगा।
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