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इतिहास के कालखंड पर नई रोशनी डालेगा बभनियांव गांव, 4000 साल पुराने मिले अवशेष

Mon, 24 Feb 2020 05:07 PM IST
गीतार्जुन गौतम आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 24 Feb 2020 05:07 PM IST
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4000 year old babhaniyanv Archaeological remains in varanasi
पुरातत्व(सांकेतिक तस्वीर)।

वाराणसी के बभनियांव में खुदाई के बाद ही प्राचीन इतिहास कालखंड पर नवीन रोशनी पड़ेगी। अविनाशी काशी के पुरातात्विक साक्ष्य मिल चुके हैं। राजघाट की खुदाई में मिले मृदभांडों और पुरातात्विक अवशेषों से काशी का इतिहास जनपदीय से उत्तर वैदिक काल 1700-1500 ईसा पूर्व का प्रमाण मिला था। रामनगर और अकथा के पुरावशेषों की डेटिंग 1750 ईसा पूर्व की है। इससे पता चलता है कि काशी का प्राचीन इतिहास चार हजार साल पुराना है। 

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अकथा और रामनगर में खुदाई के दौरान मिले मृदभांड और अधिवास की कार्बन डेटिंग से पता चला कि यह 1750 ईसा पूर्व के थे। बता दें कि काशी का लिखित उल्लेख अथर्ववेद में भी मिलता है। जिसका समय 1300-1000 ईसा पूर्व माना जाता है। राजघाट उत्खनन क्षेत्र में कुषाण, शुंग, मौर्य और पूर्व जनपदीय काल के पुरातात्विक अवशेष मिल चुके हैं।
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जनपदीय काल के निचले स्तर की खुदाई कराने के बाद वहां से काले लाल लेपित मृदभांड, वैदिक काल में देवताओं को भोग लगाने वाले पात्र, पाटरी डिस्क, रज्जू छाप, कृषि काल के मृदभांड, मनके, गुरिया, गेहूं के दाने, चूल्हा आदि मिले थे।

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क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव का कहना है कि पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर हम कह सकते हैं कि दूसरी सभ्यताओं की तरह काशी की सभ्यता का विनाश नहीं हुआ। बभनियांव के पुरातात्विक उत्खनन की अनुमति भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण द्वारा मिल चुकी है। खुदाई के बाद निकले अवशेषों के आधार पर काशी की प्राचीनता पर भी नई जानकारियां मिलेंगी।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल का कहना है कि काशी का वर्णन तो पुराणों में मिलता है। सतयुग, त्रेता और द्वापर में काशी का वर्णन किया गया है। इसकी प्राचीनता पर नित नए शोध के बाद ही वैज्ञानिक रूप से कुछ कहा जा सकता है।

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