चार साल पहले राजनीतिक करियर शुरू करने वाला एक रेलवे कर्मी का बेटा मोदी लहर में बना बसपा सांसद
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संसद के बजट सत्र के पहले दिन शुक्रवार को मऊ की घोसी सीट से सांसद रेप के आरोप में जेल में बंद रहे पेरोल पर बाहर आए आअतुल राय ने आखिरकार संसद भवन में शपथ ले ही ली। सांसद अतुल राय का राजनीतिक सफरनामा बमुश्किल चार साल का है।
उन्होंने साल 2017 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा की सदस्यता ग्रहण की। उन्हें गाजीपुर जिले की जमानियां विधानसभा से सीट से बसपा ने टिकट दिया, लेकिन वह भाजपा उम्मीदवार से हार गए। उनके पिता वाराणसी में रेल इंजना कारखाना डीएलडब्ल्यू में काम करते थे और नौकरी के दौरान ही वाराणसी में स्थाई रूप से रहने लगे थे।
अतुल राय, बलात्कार के एक मामले में पेरोल पर बाहर हैं और चुनाव के दौरान मामला उजागर होने के बाद से ही फरार थे। उस समय लगभग एक महीने तक पुलिस उन्हें खोज नहीं सकी, लेकिन वह फेसबुक पर अपने वीडियोज पोस्ट करते रहे। आखिरकार वांछित घोसी के बसपा सांसद अतुल राय ने 22 जून को वाराणसी की अदालत में समर्पण कर दिया था।
अदालत ने 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में अतुल राय को जिला जेल भेज दिया था। उस दौरान उनकी अग्रिम जमानत की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही खारिज कर दी थी। मई में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
इसलिए वह चुनाव प्रचार भी नहीं कर सके थे। हालांकि 15 मई को सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती ने घोसी में रैली करके उनके लिए वोट मांगे थे। मायावती ने उनके उम्मीदवारों को बदनाम करने के लिए भाजपा पर साज़िश रचने का आरोप लगाया था।
इसके बाद अतुल राय न ही मतदान और नतीजों के दिन दिखाई दिए थे। इसके बावजूद उन्हें बड़े अंतर से जीत मिली। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर के बीच बीजेपी उम्मीदवार हरिनारायण राजभर को एक लाख 22 हजार के बड़े मतों के अंतर से हराया था।
फरारी के दौरान फेसबुक से जीत के लिए दिया था धन्यवाद
चुनाव जीतने के बाद 24 मई को अपने फेसबुक अकाउंट पर जीत के लिए मतदाताओं को शुक्रिया कहना वह नहीं भूले। उन्होंने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें वह कहते नजर आए कि जनता की अदालत से बड़ी कोई अदालत नहीं होती और जनता की अदालत ने अपने इस बेटे को, अपने इस भाई को निर्दोष साबित किया, इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद मैं आपका अदा करता हूं। उन्होंने मतदाताओं से वादा किया था कि वह जल्द उनके सामने हाजिर होंगे।
दरअसल, अतुल राय के राजनीतिक करियर पर उस समय ग्रहण लगता नजर आया जब बलिया की एक महिला ने उनके ऊपर अपने घर में बलात्कार करने का आरोप लगाया। इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उनकी गिरफ्तारी के आदेश दिए।
जमानत के लिए वह हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गए लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस तक जारी हुआ और देशभर के हवाई अड्डों पर इस संबंध भी अलर्ट जारी किया गया। इस आरोप पर उन्होंने 20 मई को उन्होंने फेसबुक पर वीडियो पोस्ट में बयान दिया था कि जांच में वो युवती मेरा घर तक नहीं दिखा पाई। वो यह तक नहीं दिखा पाई कि किस अपार्टमेंट में मेरा फ्लैट है।