इज डूइंग बिजनेस से वाराणसी मंडल के उद्योगों को मिली नई उड़ान, 3400 नई इकाईयां हुई स्थापित
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सूबे की सरकार ने औद्योगिक इकाइयों को बढ़ावा देने को शुरू किए गए इज डूइंग बिजनेस से बनारस मंडल में नई क्रांति लिखी जा रही है। इज डूइंग बिजनेस का असर रहा कि इस वित्तीय वर्ष के दौरान बनारस मंडल में 3400 नए उद्योग व सेवा क्षेत्र की इकाइयां स्थापित हुईं। अकेले सिर्फ वाराणसी में 700 से अधिक इकाइयां लगी।
इज डूइंग बिजनेस के तहत प्रदेश सरकार ने निवेश मित्र पोर्टल शुरू किया है, जिसमें 21 विभाग हैं। उद्योग लगाने संबंधी एनओसी सहित लाइसेंस सब ऑनलाइन इन विभागों से लेनी होती है। इसके साथ ही उद्यमियों को सरकार ने छूट दे रखी है कि उद्योग शुरू करिए 900 दिन यानी कि 3 साल तक कोई अफसर परेशान करने नहीं पहुंचेगा।
बनारस मंडल में लगभग एक लाख दो हजार औद्योगिक इकाइयां है। मंडल में शामिल बनारस, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर जिले में उद्योग व सेवा क्षेत्र में निवेशकों की संख्या बढ़ रही है। उद्योग अधिकारियों के अनुसार उद्योगों की स्थापना में कोई अड़चन व झंझट नहीं होने के चलते हर दिन नई इकाइयों के रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं।
बनारस में लगभग 29000 इकाई, चंदौली में 9000, गाजीपुर में 18500 और जौनपुर में 45500 उद्योग व सेवा क्षेत्र की इकाईयां हैं। ईंट-भट्ठों की इकाइयों को भी इन्हीं में शामिल किया गया है। बनारस में इस वित्तीय वर्ष में 700 उद्योग व सेवा क्षेत्र की इकाईयों का शुभारंभ हुआ है।
माल परिवहन का सुगम साधन
व्यापार व उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जल परिवहन को भी वाराणसी से पूर्वांचल सहित बिहार और हल्दिया तक विस्तार दिया जा रहा है। रामनगर मल्टीमॉडल टर्मिनल से पटना होते हुए हल्दिया तक माल का आवागमन हो रहा है। इसके साथ ही रेलवे ने भी माल यातायात में काफी छूट दे रहा है। जिसके वजह से उद्यमियों को काफी राहत मिल रही है।
उद्योग लगाने की अड़चनें इज डूइंग बिजनेस के तहत खत्म हो चुकी है। प्रदूषण, भूमि आदि विभागों से एनओसी व लाइसेंस लेने की प्रक्रिया सब आसान हो चुकी है। इसलिए उद्योग व सेवा क्षेत्र में 3400 इकाइयां इस वित्तीय वर्ष में स्थापित हुई हैं। आने वाले दिनों में चंदौली व वाराणसी में करोड़ों की इकाइयां स्थापित होने वाली है।
उमेश सिंह, जॉइंट कमिश्नर, उद्योग
इज डूइंग बिजनेस के साथ ही उद्योग लगाने की सब कुछ प्रक्रियाएं आसान हुई है। विभागों का चक्कर काटना अब नहीं होता है।
देव भट्टाचार्या, अध्यक्ष, रामनगर औद्योगिक एसोसिएशन
इसलिए भी इकाइयों की संख्या बढ़ रही है कि अब विभिन्न विभाग वाले परेशान नहीं करते हैं। 3 साल तक उद्योग चलाने की नीति काफी कारगर हुई है।
डीएस मिश्रा, उद्यमी
भूमि आवंटन में थोड़ी और राहत मिल जाए तो इकाइयां तेजी से बढ़ेंगी। वैसे भी अब उद्यमियों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं रह गई है।
शुभम अग्रवाल, उद्यमी, करखियांव एग्रो पार्क