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लाखों की कमाई पर एकाधिकार के लिए बीएचयू के छात्रों में टकराव
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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। एमसीए के छात्र गौरव सिंह की हत्या की तफ्तीश कर रही पुलिस के सामने चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, सर सुंदर लाल अस्पताल में सक्रिय दलालों, लंका की दवा दुकानों से वसूली, अस्पताल के आसपास एंबुलेंस खड़ी होने से जुड़े कमीशन, परिसर में जारी निर्माण कार्यों में बालू, गिट्टी व ईंट की सप्लाई और ठेकेदारों से अवैध वसूली में एकाधिकार के लिए छात्र गौरव की हत्या की गई।
लंका पुलिस के अनुसार, सर सुंदर लाल अस्पताल में 60-65 दलाल सक्रिय हैं। यह दूरदराज से आने वाले मरीजों के तीमारदारों को भीड़ का हवाला देकर डॉक्टर के चेंबर में दिखाने का झांसा देते हैं। बीएचयू के नामी चिकित्सकों के नाम पर फर्जी चेंबर बनाकर वहां डॉक्टर बैठाया जाता है। इन दलालों से प्रतिमाह चार से पांच हजार रुपये कुमार मंगलम, पवन मिश्रा, रूपेश तिवारी, आशुतोष त्रिपाठी के साथ गौरव सिंह वसूलता था। सभी के दलाल चिह्नित हैं और एक-दूसरे के काम में हस्तक्षेप पर टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
इसी तरह, अस्पताल परिसर के आसपास खड़ी होने वाली एंबुलेंसों से प्रतिमाह चार से पांच हजार जबरन वसूले जाते हैं। लंका क्षेत्र की बड़ी दवा दुकानों से भी प्रतिमाह 40 से 60 हजार रुपये वसूले जाते हैं। परिसर में जो भी निर्माण कार्य हो रहे हैं, उनसे जुड़े ठेकेदारों से ईंट, गिट्टी और बालू आपूर्ति का काम लेकर कमीशन वसूला जाता है। इस काम में गौरव के बढ़ते वर्चस्व की वजह से उसकी हत्या कर दी गई। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि गौरव की हत्या से संबंधित मुकदमे की विवेचना में जो भी तथ्य सामने आ रहे हैं, उनके आधार पर कारगर कार्ययोजना बनाकर अराजक तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
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बिहार के सीवान का युवक जो चूचा के नाम से चर्चित है, वह और गौरव करीबी दोस्त हुआ करते थे। दोनों में कुछ बातों को लेकर अनबन हुई तो चूचा की करीबी कुमार मंगलम और रूपेश तिवारी से हो गई। चूचा ने गौरव के एक करीबी दलाल से एक दिन जबरन रुपये ले लिए। इसकी जानकारी गौरव को हुई तो चूचा को एलबीएस हॉस्टल में तीन दिन तक रख कर पिटाई की गई। चूचा के छूटने पर कुमार मंगलम, पवन मिश्रा सहित उनके गुट के अन्य लोगों ने गौरव को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
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लंका पुलिस के अनुसार, सर सुंदर लाल अस्पताल में 60-65 दलाल सक्रिय हैं। यह दूरदराज से आने वाले मरीजों के तीमारदारों को भीड़ का हवाला देकर डॉक्टर के चेंबर में दिखाने का झांसा देते हैं। बीएचयू के नामी चिकित्सकों के नाम पर फर्जी चेंबर बनाकर वहां डॉक्टर बैठाया जाता है। इन दलालों से प्रतिमाह चार से पांच हजार रुपये कुमार मंगलम, पवन मिश्रा, रूपेश तिवारी, आशुतोष त्रिपाठी के साथ गौरव सिंह वसूलता था। सभी के दलाल चिह्नित हैं और एक-दूसरे के काम में हस्तक्षेप पर टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
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इसी तरह, अस्पताल परिसर के आसपास खड़ी होने वाली एंबुलेंसों से प्रतिमाह चार से पांच हजार जबरन वसूले जाते हैं। लंका क्षेत्र की बड़ी दवा दुकानों से भी प्रतिमाह 40 से 60 हजार रुपये वसूले जाते हैं। परिसर में जो भी निर्माण कार्य हो रहे हैं, उनसे जुड़े ठेकेदारों से ईंट, गिट्टी और बालू आपूर्ति का काम लेकर कमीशन वसूला जाता है। इस काम में गौरव के बढ़ते वर्चस्व की वजह से उसकी हत्या कर दी गई। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि गौरव की हत्या से संबंधित मुकदमे की विवेचना में जो भी तथ्य सामने आ रहे हैं, उनके आधार पर कारगर कार्ययोजना बनाकर अराजक तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
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बिहार के सीवान का युवक जो चूचा के नाम से चर्चित है, वह और गौरव करीबी दोस्त हुआ करते थे। दोनों में कुछ बातों को लेकर अनबन हुई तो चूचा की करीबी कुमार मंगलम और रूपेश तिवारी से हो गई। चूचा ने गौरव के एक करीबी दलाल से एक दिन जबरन रुपये ले लिए। इसकी जानकारी गौरव को हुई तो चूचा को एलबीएस हॉस्टल में तीन दिन तक रख कर पिटाई की गई। चूचा के छूटने पर कुमार मंगलम, पवन मिश्रा सहित उनके गुट के अन्य लोगों ने गौरव को रास्ते से हटाने की साजिश रची।