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घने इलाकों में भी बेधड़क चल रहा पटाखों का अवैध कारोबार
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वाराणसी। शहर के कई इलाके बारूद के ढेर पर हैं। ऐसे इलाकों में पटाखा बनाने की अवैध फैक्ट्रियां पुलिस की मिली भगत से बेधड़क चल रही हैं। दुर्घटना की स्थिति में कुछ दिनों तक कार्रवाई का हो हल्ला कर खानापूर्ति की जाती है। माहौल ठंडा होते ही स्वार्थी तत्व फिर से इस अवैध कारोबार में जुट जाते हैं। शहरी इलाके में 55 से ज्यादा पटाखा बनाने वाली फैक्ट्रियां काम कर रही हैं। आम लोगों के जीवन से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
भदोही में पटाखा बनाने की फैक्ट्री में हुए धमाके की घटना के बाद एक बार फिर इस अवैध कारोबार की चर्चा शुरू हो गई है। बनारस में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में पटाखा बनाने का अवैध कारोबार फैला हुआ है। दीपावली पर बिक्री के लिए पूरे साल पटाखों का अवैध निर्माण और उनका चोरी छिपे भंडारण किया जाता है। बिना लाइसेंस के बड़ी संख्या में लोग इस कारोबार में जुटे हैं।
शहर के लहरतारा, लल्लापुरा, लोहता, पक्की बाजार, जैतपुरा, आदमपुर इलाकों में पटाखे का निर्माण किया जा रहा है। थाने व चौकियों पर शिकायतें पहुंचती नहीं और अगर शिकायत आ भी गई तो इसे अनदेखा कर दिया जाता है। दुर्घटना के बाद ही पुलिस हरकत में आती है। बनारस भी अवैध पटाखे बनाने के दौरान होने वाले विस्फोट से कई बार दहल चुका है।
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लहरतारा रेल ओवरब्रिज के नीचे रहने वाले रिंकू भारत उर्फ कुनाल सिंह के मकान में 24 अक्तूबर 2018 को जबरदस्त धमाका हुआ। धमाका इतना तेज था कि उसकी गूंज लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर तक सुनी गई। मकान की पहली मंजिल का हिस्सा ढह गया। आसपास के तीन मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में मेवालाल गुप्ता, शाहिद उर्फ सलीम व रिंकू की मासूम बेटी विधि की मौत हो गई। इसमें छह लोग घायल हुए। वाराणसी के लल्लापुरा में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री में 25 अक्तूबर 2016 को विस्फोट के बाद पांच लोगों की मौत हो गई थी। घटना में चार लोग घायल हो गए थे। दोनों ही घटनाओं में अवैध पटाखे बनते थे और सिलेंडर में भी आग लग गई थी।
आम लोगों की जागरूकता और अवैध कारोबार को सुरक्षित चलाने के लिए कारोबारी धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। लहरतारा में विस्फोट के बाद हरकत में आई पुलिस की कार्रवाई में बड़ागांव क्षेत्र के निहालापुर गांव में पटाखों का जखीरा पकड़ा गया। उस दौरान यह तथ्य सामने आया। सुनसान इलाकों और लालच के बल पर ग्रामीण क्षेत्र में पटाखों का आवैध कारोबार पांव जमा रहा।
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भदोही में पटाखा बनाने की फैक्ट्री में हुए धमाके की घटना के बाद एक बार फिर इस अवैध कारोबार की चर्चा शुरू हो गई है। बनारस में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में पटाखा बनाने का अवैध कारोबार फैला हुआ है। दीपावली पर बिक्री के लिए पूरे साल पटाखों का अवैध निर्माण और उनका चोरी छिपे भंडारण किया जाता है। बिना लाइसेंस के बड़ी संख्या में लोग इस कारोबार में जुटे हैं।
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शहर के लहरतारा, लल्लापुरा, लोहता, पक्की बाजार, जैतपुरा, आदमपुर इलाकों में पटाखे का निर्माण किया जा रहा है। थाने व चौकियों पर शिकायतें पहुंचती नहीं और अगर शिकायत आ भी गई तो इसे अनदेखा कर दिया जाता है। दुर्घटना के बाद ही पुलिस हरकत में आती है। बनारस भी अवैध पटाखे बनाने के दौरान होने वाले विस्फोट से कई बार दहल चुका है।
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लहरतारा रेल ओवरब्रिज के नीचे रहने वाले रिंकू भारत उर्फ कुनाल सिंह के मकान में 24 अक्तूबर 2018 को जबरदस्त धमाका हुआ। धमाका इतना तेज था कि उसकी गूंज लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर तक सुनी गई। मकान की पहली मंजिल का हिस्सा ढह गया। आसपास के तीन मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में मेवालाल गुप्ता, शाहिद उर्फ सलीम व रिंकू की मासूम बेटी विधि की मौत हो गई। इसमें छह लोग घायल हुए। वाराणसी के लल्लापुरा में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री में 25 अक्तूबर 2016 को विस्फोट के बाद पांच लोगों की मौत हो गई थी। घटना में चार लोग घायल हो गए थे। दोनों ही घटनाओं में अवैध पटाखे बनते थे और सिलेंडर में भी आग लग गई थी।
आम लोगों की जागरूकता और अवैध कारोबार को सुरक्षित चलाने के लिए कारोबारी धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। लहरतारा में विस्फोट के बाद हरकत में आई पुलिस की कार्रवाई में बड़ागांव क्षेत्र के निहालापुर गांव में पटाखों का जखीरा पकड़ा गया। उस दौरान यह तथ्य सामने आया। सुनसान इलाकों और लालच के बल पर ग्रामीण क्षेत्र में पटाखों का आवैध कारोबार पांव जमा रहा।