{"_id":"5a722e094f1c1ba2268b7adb","slug":"31517432329-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बृजेश की पेशी के लिए पुलिस न उपलब्ध कराना लापरवाही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बृजेश की पेशी के लिए पुलिस न उपलब्ध कराना लापरवाही
Updated Thu, 01 Feb 2018 02:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर राजीव कमल पांडेय की अदालत ने सिकरौरा नरसंहार कांड के आरोपी एमएलसी बृजेश सिंह की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न कराने को एसएसपी की लापरवाही का द्योतक माना है। कोर्ट ने कहा कि यह विचारण सर्वोच्च और उच्च न्यायालय के निर्देश पर शीघ्रातिशीघ्र पूरा किया जाना है। ऐसे में एसएसपी को निर्देशित किया जाता है कि पुलिस बल उपलब्ध कराकर प्राथमिकता के आधार पर आरोपी को कोर्ट में पेश कराना सुनिश्चित करें।
कोर्ट ने मामले में सुनवाई की अगली तिथि दो फरवरी नियत की है। कहा कि वादिनी हीरावती और आरोपी बृजेश की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए एसएसपी, एसपी चंदौली, वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार और डीजीसी को सूचित करने के साथ ही आदेश की प्रति महानिदेशक अभियोजन को भेजें। उधर, इससे पहले कोर्ट में मौजूद हीरावती की तरफ से अधिवक्ता अश्वनी कुमार और अमरेंद्र विक्रम सिंह और डीजीसी अनिल सिंह ने आवेदन देकर आरोपी बृजेश की उपस्थिति में ही वादिनी का बयान दर्ज किए जाने का अनुरोध किया। इसका विरोध आरोपी के अधिवक्ता अशोक सिंह प्रिंस और शैलेंद्र सिंह की ओर से किया गया। कोर्ट ने कहा कि बयान के समय आरोपी की मौजूदगी आवश्यक नहीं है। मौजूदगी शिनाख्त की कार्रवाई के समय आवश्यक है।
विज्ञापन
कोर्ट ने मामले में सुनवाई की अगली तिथि दो फरवरी नियत की है। कहा कि वादिनी हीरावती और आरोपी बृजेश की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए एसएसपी, एसपी चंदौली, वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार और डीजीसी को सूचित करने के साथ ही आदेश की प्रति महानिदेशक अभियोजन को भेजें। उधर, इससे पहले कोर्ट में मौजूद हीरावती की तरफ से अधिवक्ता अश्वनी कुमार और अमरेंद्र विक्रम सिंह और डीजीसी अनिल सिंह ने आवेदन देकर आरोपी बृजेश की उपस्थिति में ही वादिनी का बयान दर्ज किए जाने का अनुरोध किया। इसका विरोध आरोपी के अधिवक्ता अशोक सिंह प्रिंस और शैलेंद्र सिंह की ओर से किया गया। कोर्ट ने कहा कि बयान के समय आरोपी की मौजूदगी आवश्यक नहीं है। मौजूदगी शिनाख्त की कार्रवाई के समय आवश्यक है।
विज्ञापन