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Varanasi News: एक महीने में 26 किलो सोना बरामद, अब सड़क मार्ग से तस्करी
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डीआरआई ने एक महीने के अंदर सड़क मार्ग से सोने की तस्करी का दूसरा मामला पकड़ा है। बीते 19 दिनों में भदोही और फिर वाराणसी से 26 किलोग्राम 700 ग्राम सोना बरामद किया जा चुका है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अभी तक तस्करी का सोना लेकर आने वाले जो लोग पकड़े जाते थे, वह ट्रेन से पीडीडीयू नगर रेलवे स्टेशन आते थे। फिर, दूसरी ट्रेन पकड़कर गंतव्य के लिए रवाना होते थे। मगर, अब सोने की तस्करी से जुड़े सिंडिकेट ने अपना तरीका बदला है।
डीआरआई की मुंबई इकाई ने बीते 13 अक्तूबर की रात भदोही में जिला पुलिस के सहयोग से दो लोगों को 18 किलोग्राम सोने के साथ गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान एक तस्कर पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा था। उसके बाद बृहस्पतिवार को दो लोगों को वाराणसी से गिरफ्तार किया गया। डीआरआई के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई का तौर-तरीका देख कर तस्करी करने वाला गिरोह नए-नए हथकंडे अपनाता रहता है। इसके तहत ट्रेन से आवाजाही के परंपरागत तरीके से इतर सोना तस्करी करने वाले गिरोह से जुड़े लोग सड़क मार्ग का सहारा ले रहे हैं।
बांग्लादेश और नेपाल से चंदौली-बनारस आता है सोना
अफसरों के अनुसार विदेश से तस्करी कर लाया गया सोना बांग्लादेश और नेपाल से चंदौली के पीडीडीयू नगर रेलवे स्टेशन और वाराणसी लाया जाता है। इसके बाद सोने की खेप कानपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में खपाने के साथ ही इंदौर, दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में भी ले जाई जाती है। यह सारा खेल सोने पर लगने वाला टैक्स बचाने के लिए किया जाता है।
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पीडीडीयू नगर स्टेशन के समीप सौंपा गया था सोना
डीआरआई की प्रारंभिक पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि उन्हें सोने की खेप पीडीडीयू नगर रेलवे स्टेशन के समीप मिली थी। सोना देने वाला कौन था, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। महाराष्ट्र से किसने भेजा, इसकी जानकारी भी नहीं दे सके। आरोपी कामकाज की तलाश में थे। इसी दौरान एक व्यक्ति से संपर्क हुआ और उसने वाराणसी जाकर सोना लाने के लिए कहा। वाराणसी आने-जाने का खर्च दिया गया था। सोना पहुंचाने पर 25-25 हजार रुपये और मिलता।
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डीआरआई की मुंबई इकाई ने बीते 13 अक्तूबर की रात भदोही में जिला पुलिस के सहयोग से दो लोगों को 18 किलोग्राम सोने के साथ गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान एक तस्कर पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा था। उसके बाद बृहस्पतिवार को दो लोगों को वाराणसी से गिरफ्तार किया गया। डीआरआई के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई का तौर-तरीका देख कर तस्करी करने वाला गिरोह नए-नए हथकंडे अपनाता रहता है। इसके तहत ट्रेन से आवाजाही के परंपरागत तरीके से इतर सोना तस्करी करने वाले गिरोह से जुड़े लोग सड़क मार्ग का सहारा ले रहे हैं।
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बांग्लादेश और नेपाल से चंदौली-बनारस आता है सोना
अफसरों के अनुसार विदेश से तस्करी कर लाया गया सोना बांग्लादेश और नेपाल से चंदौली के पीडीडीयू नगर रेलवे स्टेशन और वाराणसी लाया जाता है। इसके बाद सोने की खेप कानपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में खपाने के साथ ही इंदौर, दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में भी ले जाई जाती है। यह सारा खेल सोने पर लगने वाला टैक्स बचाने के लिए किया जाता है।
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पीडीडीयू नगर स्टेशन के समीप सौंपा गया था सोना
डीआरआई की प्रारंभिक पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि उन्हें सोने की खेप पीडीडीयू नगर रेलवे स्टेशन के समीप मिली थी। सोना देने वाला कौन था, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। महाराष्ट्र से किसने भेजा, इसकी जानकारी भी नहीं दे सके। आरोपी कामकाज की तलाश में थे। इसी दौरान एक व्यक्ति से संपर्क हुआ और उसने वाराणसी जाकर सोना लाने के लिए कहा। वाराणसी आने-जाने का खर्च दिया गया था। सोना पहुंचाने पर 25-25 हजार रुपये और मिलता।